
चेन्नई, 30 जुलाई . मद्रास हाई कोर्ट ने Thursday को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके विधायक वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. यह मामला डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (डीवीएसी) से जुड़ा है, जिसमें तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन के कामकाज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है.
याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस जी.के. इलानथिरायन ने कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है और यह भी कहा कि इस मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं.
अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस दावे पर भी ध्यान दिया कि आरोपियों ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया, आपराधिक साजिश रची और Governmentी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया.
यह मामला 28 जुलाई को डीवीएसी द्वारा बालाजी और कई अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज First Information Report से जुड़ा है. यह First Information Report 2021 से 2025 के बीच टीएएसएमएसी में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज की गई थी, जब बालाजी बिजली, निषेध और आबकारी मंत्री थे.
First Information Report में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं का इस्तेमाल किया गया है. इसमें आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे आरोप शामिल हैं.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बालाजी ने Governmentी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने और Governmentी धन का दुरुपयोग करने के लिए छह अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची. इन छह लोगों में निजी व्यक्ति, डिस्टिलरी और ब्रुअरी कंपनियां, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर, बॉटलिंग फर्म और अज्ञात टीएएसएमएसी अधिकारी शामिल थे.
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस साजिश के जरिए अवैध रकम को सफेद करने का काम किया गया और साथ ही राज्य को भारी नुकसान पहुंचाया गया.
गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग करते हुए बालाजी ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि First Information Report अस्पष्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है, जिसमें कथित अपराधों से उन्हें जोड़ने वाले किसी खास टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट या लेन-देन का जिक्र नहीं है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला Political कारणों से प्रेरित था और करूर भगदड़ विवाद के बाद सत्ताधारी पार्टी की दुश्मनी की वजह से दर्ज किया गया था.
बालाजी की ओर से पेश होते हुए सीनियर एडवोकेट एन.आर. इलांगो ने दलील दी कि टीएएसएमएसी एक स्वतंत्र कॉर्पोरेशन के तौर पर काम करता है और टेंडर देने या रोजमर्रा के कामकाज को संभालने में मंत्री की कोई भूमिका नहीं होती है.
उन्होंने आगे कहा कि टीएएसएमएसी के दफ्तरों में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की पिछली तलाशी को पहले ही Supreme Court में चुनौती दी जा चुकी है और उससे जुड़ी कार्यवाही अभी भी लंबित है.
दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और गहन जांच की जरूरत, बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए तर्कों से ज़्यादा अहम है. साजिश और वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ को जरूरी मानते हुए कोर्ट ने बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.
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एसएचके/एएस