
हैदराबाद, 24 जून . हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) ने अतिक्रमण हटाकर आईटी कॉरिडोर में 1,000 करोड़ रुपए की Governmentी जमीन और शहर के बाहरी इलाके में एक तालाब को बचाया.
एजेंसी ने Tuesday को रंगारेड्डी जिले के सेरिलिंगमपल्ली मंडल के खानामेट गांव में पांच एकड़ Governmentी जमीन बचाई.
हाइड्रा ने बताया कि कुछ लोगों ने मेटल चारमीनार से हाईटेक्स एग्जिबिशन सेंटर के रास्ते में सर्वे नंबर 42 की कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी. वहां दो अस्थायी शेड और एक कमरा भी बनाया गया था.
हाइड्रा को राजस्व विभाग से शिकायत मिली थी कि जमीन के चारों ओर लोहे की चादरों से बाड़ लगाई जा रही है.
सेरिलिंगमपल्ली के रेवेन्यू अधिकारी कई सालों से इस जमीन पर अपना दावा कर रहे थे और किसी को भी वहां आने से रोक रहे थे.
उनकी गुजारिश पर हाइड्रा ने कार्रवाई की और दो अस्थायी शेड, बना हुआ कमरा और फेंसिंग हटा दी. सभी अवैध कब्जे हटाने के बाद, हाइड्रा ने लगभग 5 एकड़ Governmentी जमीन की घेराबंदी कर दी.
एजेंसी ने हाइड्रा के बोर्ड भी लगाए, जिनमें इसे Governmentी जमीन बताया गया है. इस जमीन की कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपए आंकी गई है.
एक और कार्रवाई में, हाइड्रा ने रंगारेड्डी जिले के अब्दुल्लापुरमेट मंडल के मरिपल्ली गांव में मरिपल्ली तालाब पर हुए अवैध कब्जे को हटाया.
एजेंसी ने बताया कि कब्जा करने वाले व्यक्ति ने अपनी पट्टा जमीन पर आरएसी यूनिट लगाई थी और तालाब पर कब्जा करने के लिए वहां मिट्टी डाली थी. उसने तालाब की एफटीएल सीमा के अंदर मजदूरों के रहने के लिए शेड भी बनाए थे. उसने पांच एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी.
जनता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हाइड्रा ने संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर जांच शुरू की. इसने Tuesday को शेड हटा दिए और एफटीएल सीमाओं को सुनिश्चित करने के लिए फेंसिंग लगाई. इसने खेती के काम के अवसर देकर पहल की.
हाइड्रा ने कब्जा करने वाले को तालाब में डाली गई गाद हटाने का आदेश दिया.
हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएमडीए) के रिकॉर्ड के अनुसार, मर्रिपल्ली तालाब का कुल क्षेत्रफल 31.05 एकड़ है. हाइड्रा ने इस जल निकाय (वाटर बॉडी) की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं.
हाइड्रा ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उसने दो साल से भी कम समय में 1.10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की सार्वजनिक संपत्ति को सफलतापूर्वक वापस हासिल किया और सुरक्षित किया है.
इससे अगले साल तक 2 लाख करोड़ रुपए के संरक्षण के लक्ष्य की ओर बढ़ने का भरोसा झलकता था.
एजेंसी ने कहा कि उसने झीलों, नालों, पार्कों, Governmentी जमीनों और ब्लू-ग्रीन संसाधनों को वापस हासिल किया और उन्हें सुरक्षित किया.
एजेंसी ने कहा कि जनता की ये बेशकीमती संपत्तियां, जिन पर कभी कब्जे और जमीन हड़पने की गतिविधियों का खतरा मंडरा रहा था, उन्हें अब आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित कर लिया गया है.
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