
तिरुवनंतपुरम, 27 जून . संयुक्त अरब अमीरात में लगभग पांच दशक बिता चुके एक अनुभवी प्रवासी केरलवासी ने Chief Minister वीडी सतीशन से आग्रह किया है कि प्रस्तावित तिरुवनंतपुरम-कासरगोड हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को केरल के प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई विशाल धनराशि को उत्पादक निवेश में लगाने वाली पहली बड़ी परियोजना बनाया जाए.
प्रवासी बंधु कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष केवी शमसुद्दीन ने Chief Minister वीडी. सतीशन को लिखे पत्र में कहा कि केरल के प्रवासी भारतीयों को केवल धनराशि भेजने वालों से दीर्घकालिक निवेशकों में बदलने का Government का प्रस्ताव मेट्रो मैन ई. श्रीधरन के नेतृत्व में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना से शुरू हो सकता है.
कोंकण रेलवे के लिए अपनाए गए सफल फंडिंग मॉडल के साथ समानताएं बताते हुए शमसुद्दीन ने सुझाव दिया कि राज्य इस परियोजना के लिए धन जुटाने के लिए अनिवासी केरलवासियों को सुरक्षित, भुनाए जा सकने वाले, कर-मुक्त, गैर-परिवर्तनीय बांड जारी करे.
उन्होंने कहा कि मुझे संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच कोंकण रेलवे के कर-मुक्त बांडों को बढ़ावा देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. मैंने स्वयं देखा कि प्रवासी भारतीय राष्ट्र निर्माण परियोजनाओं के प्रति कितना उत्साह दिखाते हैं. मेरा मानना है कि यदि केरल के लिए एक विश्वसनीय निवेश अवसर सृजित किया जाए, तो मलयाली प्रवासी भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देंगे.
शमसुद्दीन ने बताया कि जहां मलयाली सालाना लगभग 23-25 लाख करोड़ रुपए केरल भेजते हैं—जो India में आने वाले कुल धन का लगभग पांचवां हिस्सा है—वहीं 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की अनिवासी विदेशी (एनआरई) जमा राशि केरल के बैंकों में पड़ी रहती है, जिस पर नगण्य ब्याज मिलता है, न कि इसे उत्पादक निवेशों में लगाया जाता है.
उन्होंने कहा कि यदि इन बचत का एक अंश भी अवसंरचना, उद्योगों और रोजगार सृजन परियोजनाओं में लगाया जाए, तो केरल अपनी अर्थव्यवस्था में मौलिक परिवर्तन ला सकता है.
उन्होंने तर्क दिया कि केरल की सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की कमी नहीं, बल्कि घरेलू बचत को दीर्घकालिक निवेश में बदलने के अवसरों का अभाव है.
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एमएस/