मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर भड़के हुसैन दलवई, बोले- ‘हर क्षेत्र में हाशिए पर धकेलने की कोशिश’

Mumbai , 8 जुलाई . कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने Wednesday को Madhya Pradesh वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की आलोचना की. उन्होंने इस कदम को ‘पूरी तरह गलत’ बताया और सवाल उठाया कि क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी इसी तरह का प्रतिनिधित्व दिया जाएगा?

यह टिप्पणी तब आई, जब सीएम मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश Government ने इंदौर के मनोज मलपानी और गुना के राघोगढ़ के अनिमेष भार्गव को नए वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य के तौर पर नियुक्त किया. सांवर पटेल को 10 सदस्यों वाले बोर्ड का चेयरमैन फिर से नियुक्त किया गया है. अन्य सदस्यों में नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातेमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान शामिल हैं.

राज्य Government का दावा है कि Madhya Pradesh देश का पहला राज्य है, जिसने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है. संशोधित कानून के तहत राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य है. यह पहले के वक्फ अधिनियम, 1995 से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत सदस्य केवल मुस्लिम समुदाय से ही लिए जाते थे.

दलवई ने से ​​बात करते हुए कहा, “क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी इसी तरह मुसलमानों को शामिल किया जाएगा? क्या राम मंदिर ट्रस्ट में मुसलमानों को शामिल किया जाएगा? यह पूरी तरह गलत है. कहीं न कहीं, हर क्षेत्र में मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने की कोशिश हो रही है. इससे देश को किसी भी तरह का फायदा नहीं होगा.”

दलवई ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस विचार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने इसे लागू करने से पहले व्यापक जन-जागरूकता और चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्‍होंने कहा, “जहां तक ​यूसीसी की बात है, मैं इसका विरोध नहीं कर रहा हूं. हालांकि, लोगों को पता होना चाहिए कि असल में यूसीसी क्या है और इस पर ठीक से बहस होनी चाहिए. एक से ज्‍यादा शादियां करना गलत है, लेकिन क्या ऐसा सिर्फ मुसलमान ही करते हैं? हिंदुओं में भी ऐसे कई मामले हैं. असल में, मैंने आज ही एक Governmentी अधिकारी के बारे में सुना जिनकी तीन पत्नियां हैं और वे मुसलमान नहीं हैं. महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए और अगर यूसीसी इसे पक्का करने के लिए लाया जा रहा है, तो मैं इसका स्वागत करूंगा.”

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एएसएच/एबीएम

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