
चंडीगढ़, 4 अक्टूबर . विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने Sunday को पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) Government के ‘सिख्या क्रांति’ के बहुचर्चित दावों पर हमला बोला. बाजवा ने कहा कि Government के एक विधायक ने शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है.
बाजवा ने कहा कि Chief Minister भगवंत मान के राज्य के Governmentी स्कूलों को बदलने के बार-बार किए गए दावे विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना द्वारा उठाए गए मुद्दों से बिल्कुल उलट हैं. सुखवीर सिंह मैसरखाना ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षकों की कमी और Governmentी स्कूलों के कामकाज को लेकर सार्वजनिक रूप से शिकायतें की थीं.
बाजवा ने एक बयान में कहा कि भगवंत मान चाहे ‘सिख्या क्रांति’ का नारा दोहराते रहें, लेकिन पंजाब के Governmentी स्कूलों की हकीकत को छुपाना मुश्किल होता जा रहा है. जब आम आदमी पार्टी का एक मौजूदा विधायक सार्वजनिक रूप से कहता है कि उसके अपने बच्चे Governmentी स्कूल में पढ़ते हैं और छात्रों को प्रभावित करने वाली शिक्षकों की कमी के बारे में चिंता व्यक्त करता है, तो यह आम आदमी पार्टी के प्रचार और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है.
मैसरखाना ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके बच्चे Governmentी स्कूल में पढ़ते हैं और उन्होंने अपर्याप्त शिक्षण स्टाफ को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और Government के समक्ष उठाया था, लेकिन उनका दावा है कि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया.
बाजवा ने कहा कि उनके बयानों से आम आदमी पार्टी Government के ‘सिख्या क्रांति’ के दावे पर बुनियादी सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि अगर एक निर्वाचित विधायक को कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षकों की कमी जैसे बुनियादी मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाना पड़ रहा है, तो मान Government जिस ‘सिख्या क्रांति’ का प्रचार कर रही है, वह आखिर है क्या? शिक्षा को नारों, ब्रांडिंग और प्रचार से नहीं बदला जा सकता. इसके लिए कक्षाओं में शिक्षकों का होना, सुचारू रूप से चलने वाले स्कूल और अभिभावकों व छात्रों के प्रति जवाबदेही जरूरी है.
उन्होंने मैसरखाना के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाया. Government की सार्वजनिक आलोचना के बाद आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने विधायक को ‘दल विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता’ का हवाला देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया.
बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने संदेश को संबोधित करने के बजाय संदेशवाहक के खिलाफ कार्रवाई करना चुना है. शिक्षकों की कमी शासन का मुद्दा है, न कि दल विरोधी गतिविधि. अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करता है, तो Government को सुनना चाहिए, जांच करनी चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि उसे चुप कराना चाहिए.
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एमएस/