‘होलोकॉस्ट डे’ यहूदियों को खत्म करने की कोशिश को पहचान देने का दिन : इजरायली राजदूत

वॉशिंगटन, 28 जनवरी . हर साल 27 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर India में भी इसका आयोजन किया गया, जिसमें India के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे. इस मौके पर India में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा यहूदी लोगों को खत्म करने की कोशिश को पहचान देने का दिन है.

India में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा, “इंटरनेशनल होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस डे यहूदी लोगों को खत्म करने की कोशिश को पहचान देने का दिन है. यह एक खतरनाक नस्लवादी सोच से निकली थी, जिसने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी और पूरे यूरोप में जड़ें जमा ली थीं.”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि इसे याद रखना हम सबकी जिम्मेदारी है, क्योंकि हम ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना चाहते हैं. हमें खुशी है कि दुनिया भर के देश और प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में आए, और हम खास तौर पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने हमें अपनी मौजूदगी से सम्मानित किया.”

इजरायली राजदूत अजार ने कहा, “मैंने अपने भाषण में बताया था कि एक इंटरनेशनल होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस अलायंस है, जो यहूदी-विरोधियों से लड़ता है और शिक्षा को बढ़ावा देता है. हम दुनिया के सभी देशों का इसमें शामिल होने का स्वागत करते हैं, जिसमें India भी शामिल है.”

बता दें, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने 60 लाख से अधिक यहूदियों और उनके साथ रोमा, सिन्ती समूहों के लोगों का संहार किया था. इसके अलावा, अन्य अनगिनत पीड़ितों को असहनीय पीड़ा व क्रूरता के दौर से गुजरना पड़ा था.

इस यातना और दरिंदगी से 81 साल पहले यहूदियों को आजादी मिली थी. उस समय से हर साल 27 जनवरी को इसे स्मरण दिवस के रूप में मनाया जाता है.

नाजी या नाजीवाद एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी की एक तानाशाही Political विचारधारा और पार्टी (एनएसडीएपी) थी. यह पार्टी 1933 से 1945 के बीच सत्ता में रही. इस दौरान नाजियों ने यूरोप में 60 लाख से अधिक यहूदियों का नरसंहार किया था.

केके/एबीएम

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