
तिरुवनंतपुरम, 28 जनवरी . केरल के Chief Minister पिनाराई विजयन ने Wednesday को विधानसभा में विपक्ष के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाली की कगार पर बताया गया था. उन्होंने कहा कि केरल आज भी स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बना हुआ है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा कथित “गंभीर स्वास्थ्य संकट” पर चर्चा के लिए लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर जवाब देते हुए Chief Minister ने कहा कि विपक्ष की आलोचना Government द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों और बड़े पैमाने पर निवेश को नजरअंदाज करती है.
विजयन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान केरल ने व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित कीं और एक अभूतपूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला. उन्होंने बताया कि एलडीएफ Government के सत्ता में आने के बाद से बड़े सुधार लागू किए गए हैं, जिनमें ‘आर्द्रम मिशन’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य Governmentी अस्पतालों को उन्नत करना, मरीजों की देखभाल सुधारना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है.
Chief Minister ने आरोप लगाया कि कुछ अलग-थलग घटनाओं को पूरे सिस्टम की विफलता के तौर पर पेश किया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे दावे उस सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं, जिसे वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है.
विजयन ने कहा कि जहां भी कोई चूक सामने आती है, वहां Government हस्तक्षेप करती है और सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं, जो निरंतर सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
Chief Minister की यह प्रतिक्रिया नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीशन के तीखे भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने Government पर स्वास्थ्य सेवाओं के पतन का आरोप लगाया. सतीशन ने लापरवाही, स्टाफ की कमी और आपात सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था “वेंटिलेटर पर” है.
उन्होंने मेडिकल त्रुटियों, इलाज में देरी और मेडिकल कॉलेजों व जिला अस्पतालों में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कई मामलों का जिक्र किया. सतीशन ने यह भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित जांच समितियों से शायद ही कभी जवाबदेही तय होती है और यूडीएफ शासन के दौरान शुरू किए गए कई मेडिकल कॉलेजों की उपेक्षा की गई है.
इसके अलावा, उन्होंने बढ़ते निजी चिकित्सा खर्च का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोगों को महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हुई इस बहस ने एक बार फिर केरल की राजनीति में गहरी खाई को उजागर कर दिया है. जहां विपक्ष व्यवस्था को संकट में बताने पर अड़ा है, वहीं Government अपने सुधारों और संकट प्रबंधन के रिकॉर्ड का बचाव कर रही है.
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, स्वास्थ्य जैसे अहम सामाजिक और Political मुद्दे पर यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है.
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डीएससी