
जबलपुर, 23 अप्रैल . मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने Madhya Pradesh में बंद पड़ी आरटीओ चेकपोस्ट को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य Government को निर्देश दिया है कि प्रदेशभर में सभी चेकपोस्ट 30 दिनों के भीतर पुनः शुरू किए जाएं.
कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का पालन करना अनिवार्य है. यह आदेश याचिकाकर्ता रजनीश त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनाया गया. दरअसल, परिवहन विभाग ने पहले ही अदालत में अंडरटेकिंग दी थी कि चेक पोस्ट दोबारा चालू किए जाएंगे लेकिन इसके बावजूद अब तक वे बंद पड़े थे. इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ा रुख अपनाया.
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जस्टिस विशाल मिश्रा ने टिप्पणी की कि विभागीय अधिकारियों का रवैया कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना के समान है. उन्होंने कहा कि चाहे विभाग कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था अपनाए लेकिन अदालत के आदेशों का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि चेक पोस्ट बंद होने के बाद ओवरलोडिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. इससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है और हादसों का खतरा भी बढ़ गया है. इसी को लेकर राज्य Government के फैसले को चुनौती दी गई थी.
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य Government पर तय समय सीमा में चेक पोस्ट शुरू करने का दबाव बढ़ गया है. माना जा रहा है कि यदि आदेश का समय पर पालन होता है, तो सड़क सुरक्षा व्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है और यातायात नियमों का पालन भी सख्ती से सुनिश्चित किया जा सकेगा.
आपको बता दें कि 30 जून 2024 को प्रदेशभर में आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए गए थे. इसी वजह से परिवहन विभाग ने जांच व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया था लेकिन इस फैसले पर बाद में बड़े सवाल खड़े हुए थे और सड़कों पर निगरानी रखने जैसे सवाल सामने आए. इसके बाद रजनीश त्रिपाठी ने राज्य Government के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी तरफ से बताया गया कि चेकपोस्ट बंद होने से ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़े हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है.
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एसएके/पीएम