क्या सिर्फ डिम्पल यादव को ही संसद जाने का हक है: बेबी रानी मौर्य

Lucknow,19 अप्रैल . संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक गिरने के बाद उत्तर देश भर में विरोध देखने को मिल रहा है. उत्तर प्रदेश की महिलाएं भी इसे नारी विरोधी बता रहीं हैं. यह विधेयक Lok Sabha और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़ा था, ऐसे में विपक्ष पर महिलाओं का हक मारने का आरोप लग रहा है.

विपक्षी दलों ने Lok Sabha में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधयेक को पारित नहीं होने दिया. इसके बाद उत्तर प्रदेश में राजनीति से लेकर तमाम क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने इसे विपक्ष की चुनावी हार की शुरुआत बताया. भाजपा महिला नेताओं का कहना है कि सपा-कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष केवल अपने घर की महिलाओं को ही Lok Sabha और विधानसभा में देखना चाहता है. ये सभी परिवारवाद से ग्रस्त हैं और विपक्ष को आगामी चुनावों में आधी आबादी का हक छीनने का नुकसान उठाना पड़ेगा.

महिला नेताओं के मुताबिक पीएम Narendra Modi और सीएम योगी आदित्यनाथ की महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से विपक्ष घबराया हुआ है. उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नहीं है. पीएम Narendra Modi के कार्यकाल में ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से आजादी मिली.

उत्तर प्रदेश Government मंत्री बेबी रानी मौर्या ने कहा कि कांग्रेस एवं Samajwadi Party का महिला विरोधी चेहरा सामने आ गया है. आखिर अखिलेश यादव महिलाओं को संसद में क्यों नहीं देखना चाहते? क्या सिर्फ यादव परिवार की डिम्पल यादव को ही संसद में जाने का अधिकार है? क्या ये अधिकार देश और उत्तर प्रदेश की आम महिलाओं को नहीं मिलना चाहिए?

वहीं,प्रदेश Government में मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि आज देश की President एक महिला हैं, देश के कई उच्च पदों पर महिलाएं काम कर रहीं हैं और देश के विकास में अपना योगदान दे रहीं हैं. Prime Minister मोदी ने महिलाओं के हित में जितना काम किया है, उतना इतिहास में कभी नहीं हुआ. मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी निंदनीय कुप्रथा से आजादी मिली. अब जब देश की संसद में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित करने का वक्ता आया तो विपक्ष ने अपना महिला विरोधी चेहरा दिखा दिया.

मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि Prime Minister मोदी ने जिस India का सपना देखा है और जिस पर वे लगातार काम कर रहे हैं, उसमे अड़ंगा लगाना जैसे विपक्ष का मूल व्यवहार बन गया है. Samajwadi Party Chief Minister योगी की महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं से वैसे ही घबराई हुई है और ऐसे में अगर महिलाओं को आरक्षण मिलता है तो Prime Minister ने जिस सशक्त India का सपना देखा है, वह पूरा होता. इसे विपक्ष और अखिलेश यादव पूरा होते देखना नहीं चाहते.

भाजपा विधायक अदिति सिंह ने कहा कि एक महिला के सशक्त होने से सिर्फ परिवार ही सशक्त नहीं होता बल्कि समाज सशक्त होता है, उसका चौमुखी विकास होता है. देश की संसद में महिलाओं का योगदान बढ़ेगा तो देश के विकास को अतुलनीय रफ्तार मिलेगी, ये भला अखिलेश यादव और विपक्ष को कैसे स्वीकार होगा? फिर इनके परिवारवाद का क्या होगा? इसीलिए ये लोग विरोध कर रहे हैं.

एएसएच/डीकेपी

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