डिजिटल अरेस्ट ठगी: सीबीआई की ओडिशा और राजस्थान में बड़ी कार्रवाई, तीन गिरफ्तार

New Delhi, 3 जुलाई . केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2.07 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामले में Odisha और Rajasthan में सात स्थानों पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई पंजाब एवं Haryana हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज मामले की जांच के तहत की गई.

New Delhi, 3 जुलाई . केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2.07 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामले में Odisha और Rajasthan में सात स्थानों पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई पंजाब एवं Haryana हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज मामले की जांच के तहत की गई.

सीबीआई के अनुसार, एजेंसी ने 30 जून को Odisha और Rajasthan के सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. इस मामले में 25 मार्च को First Information Report दर्ज की गई थी. आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन और नियामक एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त Governmentी कर्मचारी को डराया-धमकाया और फर्जी कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उससे 2.07 करोड़ रुपये अलग-अलग लेनदेन के जरिए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान Odisha के बालासोर निवासी बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य तथा Rajasthan के नागौर निवासी कन्हैया लाल के रूप में हुई है.

जांच में सामने आया है कि आरोपी अपराध से अर्जित रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों के माध्यम से धन का लेयरिंग और ट्रांसफर कर रहे थे. इससे साइबर ठगी से प्राप्त धन की वास्तविक उत्पत्ति को छिपाया जा सके और उसे नेटवर्क के भीतर आसानी से स्थानांतरित किया जा सके.

सीबीआई के मुताबिक, ठगी की पूरी रकम अंततः एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में पहुंचाई गई. आरोपियों ने इस धनराशि के प्रबंधन और उसे जटिल वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला के जरिए विभिन्न खातों में भेजने में अहम भूमिका निभाई, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके.

छापेमारी के दौरान सीबीआई ने आरोपियों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं. एजेंसी का मानना है कि इनसे साइबर ठगी के व्यापक नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच जारी है और इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लाभार्थियों तथा सहयोगियों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

एजेंसी ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि फर्जी निवेश योजनाओं, कानून प्रवर्तन या Governmentी एजेंसियों के नाम पर आने वाली कॉल और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकियों से सावधान रहें तथा किसी भी दबाव में आकर धनराशि ट्रांसफर न करें.

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डीएससी

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