
आइजोल, 2 जून . मिजोरम के Chief Minister लालदुहोमा ने Tuesday को कहा कि राज्य Government जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग प्राप्त मिजोरम की अदरक को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक प्रीमियम कृषि उत्पाद के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है. इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.
उन्होंने कहा कि अदरक के उत्पादन, प्रसंस्करण (वैल्यू एडिशन) और बाजार तक पहुंच को बढ़ाने के लिए प्रयास तेज किए गए हैं. मिजोरम को पिछले वर्ष नीति आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर अदरक उत्पादन और इस क्षेत्र में बढ़ते योगदान के लिए “India की अदरक राजधानी” घोषित किया गया था.
फॉकलैंड में आयोजित मिजो जिंजर यूएसपी मिशन परियोजनाओं, अरहर (तूर), तिल और सूरजमुखी के लिए मूल्य समर्थन योजना तथा एनसीईएल जिंजर एक्सपोर्ट अवेयरनेस वर्कशॉप के उद्घाटन के अवसर पर Chief Minister ने कहा कि अदरक मिजोरम की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है. पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) ने इसे राज्य के यूनिक सेलिंग प्रपोजिशन (यूएसपी) के रूप में भी मान्यता दी है.
उन्होंने कहा कि मिजोरम की अदरक आकार में भले छोटी होती है, लेकिन इसकी उच्च गुणवत्ता और औषधीय गुण इसे बाजार में विशेष पहचान दिलाते हैं.
Chief Minister ने किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए कच्ची अदरक बेचने के बजाय उसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई.
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य Government ने डोनर मंत्रालय के सहयोग से सतत खेती और फसल कटाई के बाद प्रबंधन (पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट) परियोजना शुरू की है. इसके तहत मिजोरम के सबसे बड़े अदरक उत्पादक जिले चाम्फाई में चार आधुनिक अदरक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं. इस परियोजना के लिए डोनर मंत्रालय ने 30.13 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है.
इस पहल से लगभग 20,000 अदरक उत्पादक परिवारों को लाभ मिलने और करीब 100 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. Chief Minister ने इसके लिए Union Minister ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार भी व्यक्त किया.
उन्होंने बताया कि राज्य Government अदरक तेल और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है. निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) को किसानों और उत्पादकों को निर्यात प्रक्रियाओं तथा बाजार तक पहुंच के संबंध में प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
किसानों के हित में Chief Minister ने यह भी घोषणा की कि वर्तमान खरीफ सीजन से मिजोरम में Prime Minister आशा (पीएम-आशा) मूल्य समर्थन योजना लागू की जा रही है. इसके तहत अरहर (तूर), तिल और सूरजमुखी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी.
Government ने अरहर (तूर) का एमएसपी 84.50 रुपये प्रति किलोग्राम, तिल का 103.46 रुपये प्रति किलोग्राम और सूरजमुखी का 83.43 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है.
इन फसलों की खरीद नेफेड द्वारा मिजोरम कृषि विपणन बोर्ड के सहयोग से निर्धारित संग्रह केंद्रों पर की जाएगी. किसानों को भुगतान सीधे डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी.
Chief Minister ने कहा कि राज्य Government की मौजूदा एमएसपी योजनाओं के अलावा अब केंद्र Government द्वारा तीन और फसलों को मूल्य समर्थन मिलने से किसानों को अतिरिक्त सुरक्षा और बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे.
उन्होंने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों और संबंधित विभागों से इन योजनाओं और परियोजनाओं को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया.
कार्यक्रम में करीब 250 लोगों ने भाग लिया, जिनमें किसान, एफपीओ प्रतिनिधि, सहकारी समितियों के सदस्य और विभिन्न जिलों के अधिकारी शामिल थे. कार्यक्रम के बाद एनसीईएल की ओर से अदरक निर्यात जागरूकता कार्यशाला भी आयोजित की गई.
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डीएससी