Saturday , 19 June 2021

कोरोना के बीच तेजी से बढ़ रहे ब्लैक फंगस के मामले

नई दिल्‍ली . कोरोना (Corona virus) के संक्रमण के बीच अब एक नइ बीमारी ने कहर ढाना शुरू कर दिया है. Mucormycosis या ​​ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं. संक्रमण इतना गंभीर है कि मरीजों को जिंदा रखने के लिए उनकी आंखों को भी हटाया जा रहा है. इस फंगस के बारे में कुछ अहम जानकारियां.

mucormycosis-advisory

ब्लैक फंगस क्या है : ICMR के मुताबिक ये एक तरह का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है. शरीर में ये बहुत तेजी से फैलता है और इससे आंखों की रोशनी चली जाती है. कई मामलों में मौतें भी हो रही हैं. कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में ये संक्रमण तेजी से फैल रहा है. कोरोना से ठीक हुए मरीजों को खास ध्यान रखने की जरूरत है. जिन मरीजों को डायबिटीज है उनमें शुगर लेवल अगर बढ़ जाए तो ये इंफेक्शन जानलेवा हो जाता है.

फंगस के लक्षण

नाक से काला कफ जैसा तरल पदार्थ निकलता है.
आंख नाक के पास लालिमा के साथ दर्द होता है.
सांस लेने में तकलीफ होती है.
खून की उल्टी होने के साथ सिर दर्द और बुखार होता है.
चेहरे में दर्द और सूजन का एहसास होता है.
दांतों और जबड़ों में ताकत कम महसूस होती है.
कई मरीजों को धुंधला दिखाई देता है.
मरीजों को सीने में दर्द होता है.
स्थिति बेहद खराब होने की स्थिति में मरीज बेहोश हो जाता है.

यह भी ध्‍यान रखें

अनियंत्रित डायबिटीज स्टेरॉयड द्वारा इम्युनोसुप्रेशन बदली मानसिक स्थिति लंबे समय तक आईसीयू में रहना वोरिकोनाजोल थेरेपी की वजह से भी ब्लैक फंगस होने की आशंका बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है. इसके लक्षणों में दांतों में ढीलापन महसूस होना और मसूढ़ों में तेज दर्द होना शामिल हैं. छाती में दर्द सांस लेने में तकलीफ होना भी शामिल है.

ब्लैक फंगस के निवारण

हाइपरग्लाइसीमिया को नियंत्रित करें
COVID-19 अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ब्लड शुगर के लेवल की जांच करें.
स्टेरॉयड लेने के समय और खुराक पर ध्यान रखें.
ऑक्सीजन थेरेपी से गुजरते समय अपने पानी को ह्यूमिडिफायर के लिए साफ रखें
एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल का सही इस्तेमाल करें
अगर आप धूल भरी जगहों पर जा रहे हैं तो मास्क का इस्तेमाल करें.
मिट्टी काई या खाद को संभालते समय खुद को अच्छी तरह से ढक कर रखें.

किस पर है ज्‍यादा खतरा

ब्लैक फंगस या Mucormycosis कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को प्रभावित कर सकता है और विशेष रूप से COVID-19 रोग में रोगी को दी जाने वाली स्टेरॉयड और दवाएं किसी की इम्यूनिटी पॉवर को काफी प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए किसी को कोरोनावायरस से उबरने के बाद कम से कम 2 हफ्ते के लिए अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.

क्‍या नुकसान करता है संक्रमण

इस फंगस को गले में ही शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है. आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाती है. फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है. इसी कारण ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस से संक्रमित मरीजों की आंख निकालने के मामले सामने आ रहे हैं. अब हर दिन बढ़ रहे हैं मामले गंभीर मामलों में मस्तिष्क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है.

क्‍या सावधानियां रखनी जरूरी

आईसीयू में भर्ती मरीजों व घरों में आइसोलेट मरीजों के ऑक्सीजन मास्क के समय समय पर सफाई करने के साथ ही फ्लोमीटर के साथ लगे बोतल के पानी को नियमित अंतराल पर बदलें. पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल किया जाए. मरीजों के साथ ही सामान्य लोग भी अत्यधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें. किसी व्यक्ति का शुगर लेवल बहुत अधिक है तो ऐसे लोगों के ब्लैक फंगस से संक्रमित हो जाने का खतरा ज्यादा रहता है. कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों पर ब्लैक फंगस तेजी से हमला करता है. ऐसे में यदि इससे बचना है तो लोगों को अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना होगा.

फंगस से बचाव कैसे करें

एंटीफंगल दवाओं से ठीक किया जा सकता है.
लक्षणों के दिखने पर अपनी मर्जी से दवाओं का सेवन बिल्कुल शुरू न करें.
डॉक्टर (doctor) से सलाह के बाद ही किसी दवाई का सेवन करें.



News 2021

Please share this news