शरीर निर्बल पर भावों में बल : गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज ने पीएम मोदी पर अपनी कविता से कर दिया भाव विभोर

नई दिल्ली, 26 अप्रैल . शरीर एकदम निर्बल पड़ा है बिस्तर पर लेकिन, मन दुर्बल नहीं हुआ. कविता की पंक्तियों के जरिए आवाज ऐसी उभरती है कि कोई उस आवाज की ललकार सुन ले तो कभी नहीं माने कि यह व्यक्ति इतना बेबस है कि कई सालों से इसने कमरे के बाहर जाकर सूर्य के प्रकाश को भी अपनी खुली आंखों से नहीं निहारा है.

दस साल से देश में क्या हुआ उसने कमरे के भीतर बिस्तर पर पड़े-पड़े ही इसे महसूस किया है. लेकिन, पीएम नरेंद्र मोदी के लिए उसकी दीवानगी ऐसी की शब्दों को कलमबद्ध करके उसे कविता का रूप दे दिया.

यह पूरी कहानी है यूपी के बाराबंकी के रहने वाले अभय चांदवासिया की. जिन्होंने अपनी स्वरचित कविता के एक-एक शब्द पीएम मोदी को समर्पित किए हैं. कविता की उनकी पंक्तियों में पीएम नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, उनके राष्ट्रहित के प्रयासों और उनके नेतृत्व क्षमता का वर्णन उनकी आवाज में सुनाई पड़ती है. पीएम मोदी के लिए उनके विचार मानो पन्नों पर धारा प्रवाह बहे हों.

अभय चांदवासिया पिछले 20 वर्षों से खुद मोटर न्यूरोन डिसऑर्डर नाम की लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं और वर्तमान में 95 प्रतिशत तक शारीरिक अक्षमता के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं. फिर भी बिस्तर पर पड़े इस आदमी की सोच निर्बल नहीं हुई है, उनके हौसले इतने बुलंद है कि इतनी विषम परिस्थिति के बावजूद वह पीएम नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को जितना कलमबद्ध करने में मेहनत करते नजर आते हैं, उनकी आवाज की बुलंदी ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व को उससे भी बड़ा बना दिया है.

बीमारी ने भी अभय चांदवासिया के हौसले को नहीं तोड़ा है. वह पिछले 4 वर्षों से ना बैठ सकते हैं, ना ही खुद खाना खा सकते हैं और ना ही वो अपने हाथ-पैर तक हिला सकते हैं. बस हाथ की कुछ उंगलियों को कंप्यूटर के माउस पर चलाकर प्रधानमंत्री मोदी के लिए उन्होंने ऐसे शब्द गढ़ डाले हैं. उनकी ‘भारती का सारथी’ शीर्षक कविता का जो रूप दिख रहा है और जो उनकी आवाज में सुनाई पड़ रहा है, वह अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय है.

अभय चांदवासिया अपनी कविता में कहते हैं.

मान हो, अपमान हो या की जय जयकार हो.

कर्तव्य से डिगता नहीं वो, जीत हो या हार हो.

दे रहा संदेश सारे विश्व को बंधुत्व का.

चढ़कर सनातन की शिखा, परिचय दिया हिंदुत्व का.

स्नेह की एक बूंद पे वो प्रेम की गंगा बहा दे.

किंतु सम्मुख बैरियों के वो दहकती हुई अगन सा है.

वो एक सुमन मधुबन सा है.

कितने मुकद्दर हैं संवारे, राह जीने की है दिखाई.

लेकिन कभी अभिमान की परछाई तक है छू ना पाई.

वह कहते हैं कि पीएम मोदी के लिए जो शब्द उन्होंने लिखे हैं तो वह तो कुछ भी नहीं है. उनका व्यक्तित्व इतना बड़ा है कि उनके लिए चाहें तो 10-20 रचनाएं लिख सकता हूं. वह दावा करते हैं कि तीसरी बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजयी होंगे.

वह पीएम मोदी के लिए कहते हैं, “जो बदलते राष्ट्र की नवचेतना का केंद्र है, सप्त कोटि को जिसमें भरोसा बस वही नरेंद्र है.”

जीकेटी/