बलोच नेताओं की ट्रंप से अपील,’बलूचिस्तान पर बम बरसाने वाले पाकिस्तान से अमेरिका मांगे जवाब’

वाशिंगटन, 19 अगस्त . बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गुजारिश की है कि वो बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के हालिया हवाई हमले का संज्ञान लें और तुरंत दखल दें. इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 30 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए थे.

ट्रंप को लिखे अपने पत्र में चंद ने कहा, “हम सम्मानपूर्वक आपके प्रशासन से आग्रह करते हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच करे और यह पता लगाए कि क्या इस कथित ऑपरेशन में अमेरिका में बने किसी विमान, हथियार, ड्रोन, टेक्नोलॉजी, पुर्जों या अन्य सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था.”

बलोच समुदाय की ओर से उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि वह सुराब में हुए कथित हवाई हमलों और आम नागरिकों की मौत की जांच करे, यह पता लगाए कि क्या इसमें अमेरिका में बने सैन्य उपकरणों या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ था, और पाकिस्तान को सप्लाई किए गए संबंधित अमेरिकी रक्षा उपकरणों के ‘एंड-यूज’ (अंतिम उपयोग) और नियमों के पालन की उचित समीक्षा करे.

चंद ने अमेरिकी अधिकारियों से यह भी मांग की कि अगर अमेरिकी हथियारों के ट्रांसफर संबंधी शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो किसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराएं और जवाबदेही तय करें. साथ ही, अगर विश्वसनीय सबूतों से यह साबित होता है कि ऐसे उपकरणों का बलोच नागरिकों के खिलाफ गलत इस्तेमाल किया गया था, तो संबंधित अमेरिकी सैन्य सहायता या ट्रांसफर की समीक्षा की जाए.

पत्र में कहा गया, “राष्ट्रपति, बलोच बच्चे की जान भी दुनिया के किसी भी बच्चे की जान जितनी ही कीमती है. हम अमेरिका से सबूतों के बारे में पहले से कोई राय बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं – हम आपके प्रशासन से सच्चाई का पता लगाने, नागरिकों की सुरक्षा करने और जवाबदेही तय करने के लिए कह रहे हैं. हम इस जरूरी मामले पर उपलब्ध दस्तावेज देने और संबंधित अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार हैं.”

यह घटना 12 अगस्त की सुबह हुई थी, जब पाकिस्तानी वायु सेना ने कथित तौर पर सुराब के गिदार इलाके में रिहायशी इलाकों में अंधाधुंध बमबारी की थी, जिसमें आम नागरिक मारे गए थे और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था.

पिछले हफ्ते, कई बलोच कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने सुराब में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) – जो पाकिस्तानी सशस्त्र बलों की आधिकारिक मीडिया और जनसंपर्क शाखा है – द्वारा जारी बयान को सख्ती से खारिज कर दिया था और इसे “झूठा और मनगढ़ंत” बताया था.

यह आलोचना तब हुई जब इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक (डीजी आईएसपीआर) ने सुराब हमले को कम करके दिखाने की कोशिश की और इसे एक आतंकवादी समूह से जुड़े ‘व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ (वीबीआईईडी) के समय से पहले फटने का नतीजा बताया. पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए, बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने एक्स पोस्ट में कहा: “डीजी आईएसपीआर, जो पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर काम करता है, लंबे समय से विवादित सैन्य अभियानों के बारे में अपने गुमराह करने वाले और मनगढ़ंत बयानों और आधिकारिक रुख को लेकर कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “सुराब नरसंहार सामूहिक सजा देने की एक सोची-समझी कार्रवाई थी. सुराब के स्थानीय निवासी इस बात के गवाह हैं कि पाकिस्तान वायु सेना ने अंधेरे की आड़ में जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया, जिससे पूरा गांव बुरी तरह प्रभावित हुआ और ग्रामीणों को इसके विनाशकारी नतीजे भुगतने पड़े.”

केआर/

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