
मुर्शिदाबाद, 26 अप्रैल . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बहरामपुर विधानसभा से प्रत्याशी अधीर रंजन चौधरी ने Sunday को मुर्शिदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र Government और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने मतुआ समुदाय के मतदाताओं में फैले डर और मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा उठाया.
अधीर रंजन चौधरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मतुआ लोगों को गहरा डर सता रहा है. देश की Government ने मतुआ समुदाय के लिए जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बाद बड़ी संख्या में मतुआ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए. जब उन्हें इसकी जानकारी हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अब वे वोट देने से वंचित रह जाएंगे.”
चौधरी ने बताया कि उन्होंने बंगाल के मतुआ लोगों की समस्याओं को लेकर देश के गृह मंत्री को पत्र लिखा था और मांग की थी कि उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाए. उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इससे मतुआ समुदाय में मोहभंग हो गया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधीर रंजन चौधरी ने मुर्शिदाबाद के नेता हुमायूं कबीर पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, “हुमायूं कबीर के खिलाफ ईडी और सीबीआई कुछ नहीं कर सकती. चुनाव तक तो कुछ होगा नहीं. बाबरी मस्जिद को सामने रखकर चुनाव में जितना मुनाफा कमाना था, वो तो उन्होंने कर लिया.”
उन्होंने आगे कहा, “मस्जिद को लेकर हमारा कोई विरोध नहीं था. मुसलमानों ने मस्जिद के लिए चंदा दिया था. कितना चंदा इकट्ठा हुआ, यह जानना हो तो जांच कराई जा सकती है. मेरा सवाल है कि अभी क्यों? इतने दिनों तक कौन आपको रोक रहा था? इसलिए मैं शक में हूं कि हुमायूं कबीर ने चुनाव में धर्म के नाम पर नारा लगाकर प्रचार किया और चुनाव खत्म कर दिया. अब अचानक यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है?”
अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बंगाल में हिंसा और खून-खराबा चल रहा है. भले ही यह बड़ी संख्या में न हो, लेकिन हिंसा की घटनाएं हो रही हैं.
उन्होंने सवाल किया, “अगर केंद्रीय बलों की तैनाती के बावजूद बंगाल में हिंसा जारी है, तो केंद्रीय बलों के हटने के बाद राज्य की स्थिति क्या होगी? आज जो घटनाएं हो रही हैं, उन्हें देखकर भविष्य की स्थिति की केवल कल्पना ही की जा सकती है.”
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एससीएच/एबीएम