‘आम आदमी पार्टी’ के पतन की शुरूआत हो चुकी है : अश्विनी शर्मा

चंडीगढ़, 28 अप्रैल . पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी शर्मा ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी (आप) के पतन की शुरूआत हो चुकी है. उन्होंने राघव चड्ढा समेत छह सांसदों को आम आदमी पार्टी द्वारा ‘गद्दार’ कहे जाने की निंदा की है.

चंडीगढ़ में से बातचीत में अश्विनी शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी इतने बड़े झटके के बाद भी सोचने को तैयार नहीं है. जब कोई पार्टी सोचने को तैयार नहीं होती, तो केजरीवाल की तानाशाही के आगे सब अपना सिर झुका देते हैं.

उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा और उनके साथियों ने आम आदमी पार्टी पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ और भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था, लेकिन इस मुद्दे पर पार्टी में कोई बोलने को तैयार नहीं है.

अश्विनी शर्मा ने उन सांसदों का बचाव करते हुए कहा कि जिन लोगों को ‘गद्दार’ कहा जा रहा है, उन्होंने पंजाब को बनाने, रोजगार देने और राजस्व बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. राजेंद्र गुप्ता बरनाला और बठिंडा में 10,000 से अधिक परिवारों की आजीविका चला रहे हैं. अशोक मित्तल ने यूनिवर्सिटी के माध्यम से शिक्षा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है और कौशल विकास में भी बड़ा योगदान दिया है.

उन्होंने कहा कि वे सच्चे पंजाबी हैं. सभी ऐसे काम कर रहे हैं, जो Government को करने चाहिए. केजरीवाल की तानाशाही और पूरे सिर से पांव तक भ्रष्टाचार के कारण ये लोग पार्टी छोड़कर आए हैं. पिछले चार सालों से पंजाब में Government ठीक से नहीं चल रही है.

अश्विनी शर्मा ने आम आदमी पार्टी के मंत्रिमंडल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें से अधिकांश मंत्री कांग्रेस या अन्य पार्टियों से आए हुए हैं. ऐसे में अगर उनकी पार्टी से लोग दूसरे दल में चले जाते हैं तो उन्हें गद्दार कहना गलत होगा. राजनीति में व्यक्ति सिद्धांत लेकर आता है. जब उसे लगता है कि उसके सिद्धांत टूट रहे हैं और पार्टी वैसी नहीं रही, तो वह अपना रास्ता खुद चुन लेता है. ‘गद्दार’ जैसे शब्द इस्तेमाल करना राजनीति का सबसे निचला स्तर है. मुझे लगता है कि यह आम आदमी पार्टी के पतन की शुरुआत है. यह सभी राज्यसभा सांसद आम आदमी पार्टी से दुखी होकर आए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की स्थिति काफी खराब है, कानून व्यवस्था ठीक नहीं है. गुरदासपुर में ग्रेनेड की पिन निकालने में असफल रहे बदमाशों ने उसे कूड़ेदान में फेंक दिया. हर दिन यही हाल है. इससे साफ पता चलता है कि यह Government कानून का राज स्थापित करने में पूरी तरह नाकाम रही है.

डीकेएम/एबीएम

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