
New Delhi, 14 अप्रैल . India के पास अब यह अच्छा मौका है कि वह इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत विकल्प’ के रूप में देख सकता है.
Tuesday को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक तनाव और अस्थिरता के दौर में India अपने साझेदार देशों पर दबाव बना सकता है कि वे जल्दी से जरूरी रेल समझौतों को लागू करें, कस्टम और मानकों को एक जैसा करें, और ऊर्जा और डिजिटल कॉरिडोर के नियम साफ-साफ तय करें.
New Delhi के ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज’ की रिपोर्ट कहती है कि अगर लगातार Political इच्छाशक्ति और पर्याप्त फंडिंग मिले, तो आईएमईसी India और यूरोप के बीच व्यापार और ऊर्जा के लिए एक मजबूत वैकल्पिक रास्ता बन सकता है, जो मौजूदा और भविष्य के संकटों को संभाल सके.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बाब अल-मंडेब स्ट्रेट (एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता) अब एक बड़ा भू-Political तनाव का केंद्र बन गया है. यहां हूथी और ईरान से जुड़ी गतिविधियां वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा पैदा कर रही हैं. इस रास्ते से दुनिया का लगभग 10 प्रतिशत तेल और करीब 20 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है. अगर यहां रुकावट आती है, तो जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता लेना पड़ता है, जिससे लागत बहुत बढ़ जाती है.
India के लिए यह खास चिंता की बात है, क्योंकि उसका करीब 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री रास्तों से होता है. ऐसे में इस तरह की अस्थिरता देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमईसी एक अहम समाधान बन सकता है. यह जमीन और समुद्र दोनों रास्तों को जोड़कर एक ऐसा विकल्प देता है, जो संवेदनशील समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करता है.
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर अल-मंडेब स्ट्रेट में भी स्ट्रेट होर्मुज जैसी स्थिति बनती है, तो सप्लाई चेन और ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, रिपोर्ट में कहा गया है कि यमन के हूथी (जिन्हें ईरान का समर्थन है) ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं. 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद, ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया और स्ट्रेट को भी एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया, जिससे दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया. वहीं, दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच भी संघर्ष चल रहा है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हूथी इस युद्ध में पूरी तरह शामिल हो जाते हैं, तो अल-मंडेब स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गाजा युद्ध के बाद हूथियों की ओर से लगाए गए अवरोध के बावजूद, India ने अपने व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को संभाल लिया. इसके लिए India ने रास्ते बदलना, अतिरिक्त खर्च उठाना, नौसेना की मौजूदगी बढ़ाना और पहले से तैयारी जैसे कदम उठाए.
India ने एक संतुलित रणनीति अपनाई; वह अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्डियन में शामिल नहीं हुआ, लेकिन उसने अपनी नौसेना की निगरानी और गतिविधियां अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर में काफी बढ़ा दीं.
अंत में रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह की समुद्री अस्थिरता के बाद अब नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं. जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, बीमा जोखिम को साझा करना, और नए व्यापारिक रास्ते विकसित करना. इनमें आईएमईसी को एक मध्यम अवधि के मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
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एवाई/डीएससी