
Bengaluru, 14 अप्रैल . पूर्व Chief Minister और सांसद बसवराज बोम्मई ने सभी Political दलों से अपील की है कि वे अपने मतभेदों को दूर कर महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है.
Bengaluru में मीडिया से बात करते हुए बोम्मई ने सभी दलों से अपील की कि वे India के लोकतांत्रिक भविष्य के हित में एक साथ आएं और महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें.
उन्होंने कहा कि जल्द ही Lok Sabha का विशेष सत्र होने वाला है और उन्हें खुशी है कि संसद महिला आरक्षण और परिसीमन पर एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी चर्चा करने जा रही है. आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं के लिए प्रावधान किए थे.
उन्होंने यह भी कहा कि Prime Minister Narendra Modi की सोच भी इसी तरह की है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस तरह के कदम का समर्थन किया था. कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए Government ने 2008 में महिला आरक्षण विधेयक (108वां संशोधन विधेयक) पेश किया था, जिसे 2010 में राज्यसभा में पारित किया गया था.
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना एक साझा आकांक्षा है और विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की.
Governmentी नौकरियों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर केस दर्ज होने के सवाल पर बोम्मई ने कहा कि पिछले एक साल से Governmentी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं और अब ये प्रदर्शन बढ़ रहे हैं. उन्होंने कर्नाटक Government पर युवाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और कहा कि Chief Minister और उपChief Minister ने एक महीने में नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया था, जो पूरा नहीं हुआ.
उन्होंने आरोप लगाया कि Government शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रही है और इसे ‘संविधान विरोधी’ बताया. उन्होंने कहा कि Government संवैधानिक मूल्यों और जनता के हितों के खिलाफ काम कर रही है और चेतावनी दी कि भले ही अभी Police कार्रवाई से प्रदर्शन दबाए जा रहे हों, लेकिन भविष्य में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
राज्य कांग्रेस के भीतर अल्पसंख्यक नेताओं से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि यह केवल नेतृत्व का मामला नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों में व्यापक असंतोष का संकेत है. उन्होंने दावा किया कि जो समुदाय पहले कांग्रेस के वोट बैंक माने जाते थे, वे अब उससे नाराज हो रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय भी कांग्रेस से भरोसा खो रहे हैं और भविष्य में इसका कड़ा विरोध कर सकते हैं.
Chief Minister सिद्दारमैया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एएचआईएनडीए के बैनर तले शासन चलाने के बावजूद कई समुदाय अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
उन्होंने कांग्रेस विधायकों के दिल्ली जाने की खबरों पर कहा कि यह दर्शाता है कि Chief Minister अपने मंत्रियों और विधायकों पर नियंत्रण खो चुके हैं. सिद्दारमैया एक अनुभवी नेता होने के बावजूद अपने ही खेमे में असंतोष का सामना कर रहे हैं और विधायक स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं. यह अटकलें भी हैं कि Chief Minister स्वयं इन घटनाओं के पीछे हो सकते हैं.
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एएमटी/एबीएम