
New Delhi, 19 अप्रैल . देशभर में आज भी कई ऐसी इमारतें, किले, या जगहें हैं जहां India के समृद्ध इतिहास और शक्ति की झलक साफ देखने को मिलती है.
Maharashtra वीर योद्धाओं की भूमि रही है, जहां वीरता और इतिहास की गवाही हर किला देता है, लेकिन कुछ किले आज भी जीवंत लगते हैं. हम बात कर रहे हैं रायगड किले की, जिसका जीर्णोद्धार छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वयं किया था.
रायगड का किला Maharashtra के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक है. यह महाड से लगभग 25 किलोमीटर ऊंचे पहाड़ को काटकर बनाया गया है. 1674 ईस्वी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने किले का जीर्णोद्धार कराया और इसे मराठा साम्राज्य की राजधानी घोषित किया. किले तक पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं है. किले तक पहुंचने के लिए कई सीढ़ियों को पार करके जाना होता है, लेकिन अब पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए Maharashtra Government ने रोपवे की सुविधा की है.
रायगड किले के पास एक कृत्रिम झील है, जिसे “गंगासागर झील” कहा जाता है. किले तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता “महा-दरवाजा” है. किले की खास बात है इसे बनाने की तकनीक. किले में सिंहासन की एक प्रतिकृति है, जो महल के दरवाजे को सिंहासन से जोड़ती है. माना जाता है कि अगर किले के दरवाजे पर बनी प्रतिकृति से अगर कुछ बोला जाए तो उसे किले के अंदर बने सिंहासन कक्ष तक सुना जा सकता है.
रायगड किले के बाहर का नजारा भी शांति प्रदान करता है. यहां प्राकृतिक झरनों से लेकर सुंदर जंगली फूल और अधिक संख्या में पेड़ भी देखने को मिल जाते हैं. रास्ता भले भी दुर्गम है लेकिन अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो आपके लिए यह प्लेस शानदार करने वाला है, हालांकि गर्मी के मौसम में वहां जाने से बचें क्योंकि गर्मियों के महीनों में रायगड का तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है और उमस की वजह से ट्रैकिंग करना भी मुश्किल हो जाता है. ट्रैंकिग के दौरान अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर आएं क्योंकि किले के आस-पास इस चीजों की सुविधा नहीं मिलेगी.
अगर आप रायगड के किले को देखने का प्लान बना रहे हैं, तो उससे कुछ ही दूरी पर मुरुड-जंजीरा फोर्ट, कोलाबा फोर्ट, और भोरपगढ़ फोर्ट भी देखने के लिए जरूर जाएं. ये तीनों ऐतिहासिक किले कुछ ही दूरी पर बने हैं और सभी का अपना समृद्ध इतिहास रहा है.
–
पीएस/एएस