
वॉशिंगटन, 16 अप्रैल . Pakistan में अमेरिका-ईरान की वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी Government अब तेहरान को घेरने के लिए दूसरा तरीका अपना रही है. अमेरिका का कहना है कि ईरान के आर्थिक रूप से कमजोर करना होगा. ऐसे में ट्रंप Government ने ईरान के खिलाफ अपना आर्थिक कैंपेन तेज कर दिया है.
अमेरिका ने ईरान को कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है, जिसमें ईरानी तेल से डील करने वाले देशों और बैंकों पर सेकेंडरी पेनल्टी भी शामिल है. अधिकारियों ने इसे वित्तीय और भू-Political दबाव को मिलाकर एक बड़ी रणनीति बताया है.
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ अपने वित्तीय हमले को बढ़ा रहा है, जिसे उन्होंने “ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी” बताया. बेसेंट ने कहा, “एक साल से ज्यादा समय से ईरानी Government में पेमेंट रोकने और आईआरजीसी के अकाउंट्स पर नजर रखने के लिए हमने ईरानियों पर सबसे ज्यादा दबाव डाला है.”
उन्होंने कहा कि अमेरिका अब साझेदार देशों पर तेहरान के खिलाफ और ज्यादा कड़े कदम उठाने के लिए दबाव डाल रहा है, जिसमें ईरान के नेतृत्व से जुड़े फंड्स को फ्रीज करना भी शामिल है. उन्होंने कहा, “हमने उनसे यह अपील की है कि हम आईआरजीसी और ईरानी लीडरशिप के किसी भी सदस्य के और फंड्स को फ्रीज करना चाहते हैं.”
बेसेंट ने चेतावनी दी कि Government उन देशों और संस्थान पर सेकेंडरी बैन लगाने के लिए तैयार है जो ईरानी तेल रेवेन्यू से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा, “हमने देशों से कहा है कि अगर आप ईरानी तेल खरीद रहे हैं, अगर ईरानी पैसा आपके बैंकों में पड़ा है, तो हम अब सेकेंडरी बैन लगाने को तैयार हैं.” अमेरिकी नेता ने इसे बहुत सख्त कदम बताया.
वित्त सचिव ने कहा कि कार्रवाई पहले से ही चल रही है और वित्तीय संस्थान को चेतावनी भी जारी कर दी गई है. उन्होंने कहा, “दो चीनी बैंकों को अमेरिकी वित्त मंत्रालय से चिट्ठी भेजी गई है, अगर उनके सिस्टम से ईरानी फंड का पता चला तो कार्रवाई की जाएगी.”
बेसेंट ने कहा, “अमेरिका ऊर्जा से जुड़े प्रतिबंधों को और सख्त करेगा. हम ईरानी तेल पर जनरल लाइसेंस रिन्यू नहीं करेंगे.” अमेरिकी की तरफ से की जा रही कार्रवाई को देखकर तेहरान के एक्सपोर्ट रेवेन्यू को सीमित करने के लिए सख्त रवैया अपनाने का संकेत मिलता है.
उन्होंने बढ़ते दबाव को हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों से जोड़ते हुए कहा कि ईरान की कार्रवाइयों ने पड़ोसी देशों का रुख बदल दिया है. उन्होंने कहा, “ईरानियों की एक गलती यह थी कि उन्होंने अपने जीसीसी पड़ोसियों पर बमबारी की. वे देश अब वित्तीय फ्लो को ट्रैक करने में बहुत ज्यादा पारदर्शी हो गए हैं.”
प्रशासन ने कहा कि आर्थिक उपाय चल रहे डिप्लोमैटिक जुड़ाव के साथ मिलकर किए गए प्रयास का हिस्सा थे.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि इस स्ट्रैटेजी का मकसद लंबे समय के सुरक्षा लक्ष्य हासिल करना है. उन्होंने कहा, “यह अमेरिका के लंबे समय के स्ट्रैटजिक गोल के लिए एक शॉर्ट-टर्म रुकावट है.”
अधिकारियों ने इशारा किया कि ईरान के खिलाफ दबाव अभियान बातचीत के साथ-साथ जारी रहेगा. इसमें बातचीत जारी रहने तक ईरान की वित्तीय क्षमता को लिमिट करने के लिए बैन लगाए जाएंगे.
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केके/वीसी