ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर पूर्व यूएस एनएसए ने उठाए सवाल, ‘चीन का क्लाइंट’ बताया (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

वॉशिंगटन, 22 अप्रैल . अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर ने ईरान से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशों में Pakistan की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने Pakistan को चीन का “क्लाइंट” बताते हुए उसकी मध्यस्थता पर संदेह जताया.

को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मैकमास्टर ने कहा कि Pakistan को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का करीबी सहयोगी माना जाना चाहिए; उनका मानना है कि ऐसे में ईरान-अमेरिका वार्ता में उसकी भूमिका को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता.

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने Tuesday को इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता के दूसरे दौर को रद्द कर दिया.

मैकमास्टर ने चीन की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजिंग की दिलचस्पी ईरान में मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने में है. “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक को सत्ता में बनाए रखने के लिए बेताब है,” उन्होंने कहा. उनके अनुसार, चीन का यह रुख क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अपने आर्थिक हितों से जुड़ा है.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि Pakistan की ओर से मध्यस्थता की पेशकश पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो सकती. “इन वार्ताओं में मध्यस्थ बनने की पेशकश के पीछे कोई न कोई छिपा हुआ उद्देश्य हो सकता है,” मैकमास्टर ने कहा.

Pakistan की सुरक्षा नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को “निराशाजनक” बताया. उनके अनुसार, Pakistan अक्सर दोहरी नीति अपनाता है—एक तरफ वह आतंकवाद विरोधी सहयोग की बात करता है, वहीं दूसरी ओर विरोधी तत्वों को समर्थन देता है.

मैकमास्टर ने कहा कि India द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे ये मुद्दे नए नहीं हैं. “Pakistan 1940 के दशक के अंत से ही आतंकवादी संगठनों को अपनी विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है,” उन्होंने कहा.

उन्होंने चीन-ईरान संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि बीजिंग की आर्थिक मदद तेहरान के लिए अहम है. “चीन ईरान के तेल का करीब 90 प्रतिशत खरीदता है, जिससे वहां की Government को वित्तीय सहारा मिलता है,” उन्होंने कहा. उनके मुताबिक, इससे ईरान अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम रहता है.

मैकमास्टर ने निष्कर्ष में कहा कि इन सभी कारकों को देखते हुए Pakistan की कूटनीतिक भूमिका को चीन की व्यापक रणनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

केआर/

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