
New Delhi, 8 फरवरी . देश की शीर्ष उद्योग संस्था भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) ने एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाला एक पायलट एयर कॉरिडोर मॉडल सुझाया गया है. इसका उद्देश्य शहरों में ट्रैफिक कम करना और लोगों का यात्रा समय घटाना है.
सीआईआई की यह रिपोर्ट ‘India में उन्नत हवाई गतिशीलता के भविष्य का मार्गदर्शन’
नाम से जारी की गई है, जिसे नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने लॉन्च किया. रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (ईवीटीओएल) विमान यानी एयर टैक्सी का इस्तेमाल India के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकता है, क्योंकि ये बिना प्रदूषण के चलते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) के अंदर एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (एएएम) के लिए एक अलग और मजबूत नियामक विभाग बनाया जाना चाहिए. इससे ईवीटीओएल और एयर टैक्सी जैसी सेवाओं को भारतीय हवाई क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकेगा.
डीजीसीए के भीतर यह विशेष इकाई विमान की सुरक्षा, संचालन और उड़ान से जुड़े नियम तैयार करेगी, जिसमें कम ऊंचाई पर शहरों के ऊपर उड़ान भरने वाले ईवीटीओएल विमानों के लिए खास मानक बनाए जाएंगे. रिपोर्ट में इन नई हवाई सेवाओं को धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से लागू करने की योजना बताई गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी योजना एजेंसियों और स्मार्ट सिटी मिशन के साथ मिलकर एयर कॉरिडोर और वर्टीपोर्ट (जहां एयर टैक्सी उतरेंगी) को शहरों की मास्टर प्लानिंग में शामिल किया जाना चाहिए. इससे जमीन की उपलब्धता, दूसरे परिवहन साधनों से जुड़ाव और बैटरी चार्जिंग की व्यवस्था आसान होगी.
दिल्ली, Mumbai और Bengaluru जैसे बड़े शहरों में छतों पर वर्टीपोर्ट एक सस्ता और आसान समाधान हो सकता है. हालांकि, अभी डीजीसीए के नियमों के तहत छतों से व्यावसायिक उड़ानों की अनुमति नहीं है. भविष्य में यह नियम सुरक्षा जांच और नए नियम बनने के बाद ही लागू हो सकेगा.
रिपोर्ट बताती है कि जमीन पर नए वर्टीपोर्ट बनाना बहुत महंगा है और इसमें Governmentी मंजूरी में भी देरी होती है. वहीं, इमारतों की छतें पहले से मौजूद और कम इस्तेमाल की गई जगह हैं. इन्हें ऑफिस इलाकों, अस्पतालों, टेक पार्क और रिहायशी इमारतों में बनाया जा सकता है, जिससे लोग आसानी से इनका उपयोग कर सकें.
रिपोर्ट में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), बैंकों और Governmentी फंड एजेंसियों से अपील की गई है कि वे एडवांस्ड एयर मोबिलिटी के लिए अलग फंडिंग व्यवस्था बनाएं. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, लीजिंग और लोन गारंटी जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं, ताकि निवेशकों का जोखिम कम हो.
रिपोर्ट में 50 से 100 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन के जरिए सामान और जरूरी मेडिकल सप्लाई पहुंचाने की सिफारिश की गई है. साथ ही एनसीआर, Bengaluru और Mumbai जैसे इलाकों में पीपीपी मॉडल के तहत टेक-ऑफ और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने पर जोर दिया गया है.
सीआईआई ने कहा कि यह रिपोर्ट एक एयर कॉरिडोर आधारित अध्ययन पर तैयार की गई है और यह नीति निर्माताओं, निवेशकों और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए एक अहम मार्गदर्शक बनेगी, जिससे India में सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक हवाई परिवहन की दिशा तय होगी.
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