
New Delhi, 22 जून . अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने Monday को मुसलमानों के सामाजिक और Political हाशिए पर धकेले जाने और मस्जिदों और मदरसों के विध्वंस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया.
बोर्ड की कार्यकारी समिति ने लोकतंत्र-प्रेमी और शांतिप्रिय समाज के वर्गों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए एक कार्य समिति का गठन किया है. इस आंदोलन का उद्देश्य ‘घृणा और शत्रुता को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने, मुसलमानों के जीवन, संपत्ति, सम्मान और गरिमा पर हमलों’ को उजागर करना है.
बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह बात सामने आई कि यूएनआईसीसी का जबरन कार्यान्वयन India के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के विपरीत है.
कार्यकारी समिति ने भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता के नाम पर चल रहे विधायी प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की.
बैठक में यह बात सामने आई कि उत्तराखंड और Gujarat के बाद अब असम, Madhya Pradesh और Maharashtra में भी यूसीसी (वंदे मातरम) लागू करने की तैयारियां चल रही हैं.
कार्यकारी समिति ने संकल्प लिया कि जिस प्रकार बोर्ड ने उत्तराखंड Government के यूसीसी कानून को नैनीताल उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, उसी प्रकार वह अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के कानूनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.
समिति ने कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के प्रयास संविधान के अनुच्छेद 25 के विपरीत हैं.
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र Government संसद के माध्यम से सभी नागरिकों या स्कूली छात्रों के लिए वंदे मातरम को अनिवार्य करने जैसा कोई कदम उठाती है, तो बोर्ड इसके खिलाफ न्यायालयों का रुख करेगा.
कार्यकारी समिति ने पश्चिम बंगाल Government के स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गाने को अनिवार्य करने वाले निर्देश पर रोक लगाने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश का स्वागत किया.
इसमें कहा गया है कि वंदे मातरम की सामग्री मुसलमानों के तौहीद (ईश्वर की एकता) के विश्वास के विपरीत है, इसलिए इस्लामी कानून में इसकी अनुमति नहीं है.
बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की कि वे सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपने विश्वासों और आस्थाओं से समझौता न करें.
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एमएस/