एआईएडीएमके के बागी विधायकों के लिए समयसीमा नजदीक, पार्टी में मतभेद कम होने के संकेत

चेन्नई, 25 मई . एआईएडीएमके के 25 विधायकों द्वारा पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर 13 मई को हुए विश्वास मत में विजय के नेतृत्व वाले टीवीके Government के पक्ष में मतदान करने के मामले में कार्रवाई माफ करने की 15 दिन की समयसीमा 27 मई को समाप्त हो रही है. इस बीच संकेत मिल रहे हैं कि एआईएडीएमके के दोनों गुट Political और कानूनी संकट को बढ़ने से रोकने के लिए सौहार्दपूर्ण समाधान की ओर बढ़ सकते हैं.

पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर 25 विधायकों द्वारा टीवीके Government के पक्ष में मतदान किए जाने के बाद एआईएडीएमके के भीतर गंभीर आंतरिक संकट पैदा हो गया था. पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को Government के खिलाफ मतदान करने का निर्देश दिया था.

Political विश्लेषकों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना था कि यदि पार्टी नेतृत्व 15 दिनों के भीतर इस कार्रवाई को औपचारिक रूप से माफ नहीं करता, तो संबंधित विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है.

एआईएडीएमके महासचिव पलानीस्वामी के करीबी पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुलह प्रक्रिया के तहत बागी विधायक पार्टी नेतृत्व से खेद व्यक्त कर सकते हैं, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता संबंधी कार्यवाही वापस लेने के लिए औपचारिक पत्र भेजा जा सकता है.

पलानीस्वामी के करीबी एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “दलबदल विरोधी कानून के तहत पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायक निर्धारित समयसीमा के भीतर पार्टी द्वारा कार्रवाई माफ किए जाने पर अयोग्यता से बच सकते हैं. इसके लिए संबंधित विधायकों को पहले नेतृत्व से संपर्क करना होगा.”

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रतिद्वंद्वी गुट के कई विधायक पहले ही मुख्यधारा नेतृत्व में लौटने की इच्छा जता चुके हैं. चूंकि चुनाव के बाद कई विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में नेतृत्व के साथ बातचीत होने की संभावना है.

सूत्रों ने यह भी कहा कि यदि अयोग्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो इससे सत्तारूढ़ टीवीके Government को फायदा हो सकता है क्योंकि विधानसभा की प्रभावी संख्या घटने से Government के लिए आवश्यक बहुमत का आंकड़ा कम हो जाएगा.

वहीं, टीवीके सूत्रों ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं है, जिससे कानूनी समीक्षा और Political घटनाक्रम के लिए समय मिल सकता है.

बताया जा रहा है कि संभावित समझौते के तहत हटाए गए जिला सचिवों को बहाल करना और विधानसभा अध्यक्ष व चुनाव आयोग के समक्ष दायर याचिकाओं को वापस लेना भी शामिल हो सकता है.

इस बीच, पार्टी में सुलह की अटकलों को बल देते हुए वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि ने हाल ही में कहा कि पार्टी के भीतर कोई विवाद नहीं है और पलानीस्वामी ही एआईएडीएमके के महासचिव बने रहेंगे. उन्होंने जल्द आम परिषद की बैठक बुलाने की मांग भी दोहराई.

पीएम

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