पाकिस्‍तान में लगभग 28 प्रतिशत बच्चे नहीं जाते स्‍कूल, लड़क‍ियों की संख्‍या ज्‍यादा: र‍िपोर्ट

इस्लामाबाद, 18 मार्च . Pakistan में 5-16 साल की उम्र के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते. चिंता की बात यह है कि लड़कियों पर इसका असर ज्यादा है.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, 22 प्रतिशत लड़कों की तुलना में 34 प्रतिशत लड़कियों का स्कूलों में दाखिला नहीं है.

ये असमानताएं Pakistan के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती हैं, खासकर लड़कियों के मामले में. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि लिंग और भौगोलिक स्थिति किस तरह शिक्षा तक पहुंच को सीमित कर देते हैं.

Pakistan के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने गैलप Pakistan के एचआईईएस सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि दस साल और उससे ज्यादा उम्र के दो-तिहाई Pakistanियों ने कभी न कभी स्कूल में पढ़ाई की है, लेकिन Pakistan में शिक्षा तक पहुंच अभी भी बहुत असमान बनी हुई है.

Pakistan की राष्ट्रीय साक्षरता दर 63 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 73 प्रतिशत और महिलाओं की 52 प्रतिशत है.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी इलाकों में साक्षरता दर 77 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 56 प्रतिशत है. जहां 68 प्रतिशत बच्चों का दाखिला प्राइमरी स्कूल में होता है, वहीं शिक्षा के उच्च स्तरों पर यह संख्या तेजी से घट जाती है. मिडिल स्कूल में केवल 40 प्रतिशत बच्चे पढ़ते हैं, और मैट्रिक (10वीं) तक आते-आते यह संख्या लगभग 30 प्रतिशत रह जाती है.

स्कूलों में शिक्षा जारी रखने वाले छात्रों की संख्या में यह भारी गिरावट उन चुनौतियों को उजागर करती है जिनका सामना उन्हें करना पड़ता है, खासकर ग्रामीण और वंचित इलाकों में. यह सुरक्षा संबंधी चिंताओं, स्कूल की दूरी और बढ़ती अवसर लागतों (जैसे बच्चों की उम्र बढ़ना) जैसी ढांचागत बाधाओं की ओर इशारा करता है. ये बाधाएं ग्रामीण लड़कियों के लिए विशेष रूप से ज्यादा होती हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक दबाव, घरेलू जिम्मेदारियां और प्राइमरी के बाद की स्कूली शिक्षा के सीमित विकल्प बच्चों के स्कूलों में पढ़ाई जारी न रखने के मुख्य कारण हैं.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट बताती है कि सामाजिक अपेक्षाओं और कम उम्र में शादी के कारण लड़कियों के लिए ये चुनौतियां और भी बढ़ जाती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan में सबसे ज्यादा साक्षरता दर पंजाब प्रांत की है, जो 66 प्रतिशत है, जबकि सिंध की साक्षरता दर 61 प्रतिशत है. खैबर पख्तूनख्वा की साक्षरता दर 55 प्रतिशत है, जबकि बलूचिस्तान की साक्षरता दर केवल 43 प्रतिशत है.

एवाई/डीकेपी

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