
New Delhi, 25 अगस्त . हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.
पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “मुझे लगता है कि किसी को भी हिजाब के नाम पर सांप्रदायिक विवाद या तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. शिक्षण संस्थानों के अपने ड्रेस कोड, अनुशासन और नियम होते हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी यही बात कही है. मेरा मानना है कि इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक संक्रमण किसी को पैदा नहीं करना चाहिए और सभी को सावधान रहना चाहिए. इससे किसी की आस्था और सम्मान को कोई खतरा नहीं है.”
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा, “कोर्ट ने जो कहा है, वह सही कहा है और पूरा देश कोर्ट का सम्मान करता है. इस देश में हर किसी के अपने अधिकार हैं और Prime Minister Narendra Modi इन अधिकारों के रक्षक हैं. वह हमेशा सम्मान के साथ और सभी के प्रयासों से Government चला रहे हैं. मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि हमारी Government सभी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ रही है. मैं बस यही कहना चाहता हूं.”
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “अदालतों ने हिजाब, बुर्का और ऐसी चीजों के बारे में एक बार नहीं, बल्कि कई बार कहा है कि ये न तो इस्लाम का हिस्सा हैं, न ही इस्लामी मान्यताओं या कुरान का हिस्सा हैं, और न ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति यह कहती है कि छोटी, मासूम बच्चियों को आपकी कट्टरपंथी सोच की वजह से बंधक बनाकर रखा जाए. जिस तरह कम उम्र की लड़कियां स्कूल जाती हैं, जहां उन्हें समानता, एकता, अखंडता और भाईचारे की सीख दी जाती है, तो आप क्यों उन्हें वहां अलग-थलग करना चाहते हैं और अपनी धार्मिक पहचान के कारण उन्हें दूसरे बच्चों से अलग दिखाना चाहते हैं. हमें लगता है कि अब तक Supreme Court और कई हाई कोर्ट इस मुद्दे पर बार-बार फैसले सुना चुके हैं. इसके बावजूद, ऐसे लोग बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं और न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद करते हैं.”
वरिष्ठ वकील और भाजपा नेता नलिन कोहली ने कहा, “इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जो कहा है, वह किसी धर्म की ‘आवश्यक प्रथाओं’ के बारे में Supreme Court के अलग-अलग फैसलों पर आधारित प्रतीत होता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे शिक्षा के लिए उन स्कूलों में जाते हैं जो धर्म के आधार पर नहीं चलते हैं, और वहां एक यूनिफॉर्म है. संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत, हमारे अल्पसंख्यक भाई-बहन, चाहे वे इस्लाम, ईसाई या सिख समुदाय से हों. उन्हें अपने संबंधित शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार है. यदि किसी परिवार को लगता है कि उनकी बेटी को उस आधार पर पढ़ाई करनी चाहिए, तो ऐसे संस्थान उपलब्ध हैं, और वे वहां पढ़ने के लिए जा सकते हैं, लेकिन जो स्कूल धर्म पर आधारित नहीं हैं, वहां शिक्षा और वर्दी स्वाभाविक रूप से लागू होगी.”
बिहार Government में मंत्री रत्नेश सदा ने कहा, “हर भारतीय नागरिक को कोर्ट का सम्मान करना चाहिए और मैं कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं. स्कूल आने के लिए छात्रों को तय स्कूल यूनिफॉर्म पहननी होती है, हिजाब नहीं. इसलिए, कोर्ट का फैसला सही है.”
भाजपा नेता अशोक वाजपेयी ने कहा, “माननीय हाई कोर्ट के फैसले के बाद, इस पर किसी भी तरह की टिप्पणी की कोई गुंजाइश नहीं है. माननीय हाई कोर्ट ने सभी जरूरी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह फैसला लिया होगा. यह भी साफ है कि इस्लाम में कहीं भी हिजाब या बुर्का पहनने का आदेश नहीं दिया गया है.”
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एसडी/एएस