संयुक्त तैयारियों से मजबूत होगी भारत की समुद्री सुरक्षा, ‘एक्सरसाइज सी विजिल-26’ के लिए मुख्य योजना सम्मेलन संपन्न

New Delhi, 26 अक्टूबर . भारतीय नौसेना ने देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं. भारतीय नौसेना के प्रवक्ता, नौसेना मुख्यालय एवं डीपीआर, रक्षा मंत्रालय, New Delhi के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से पोस्ट करके जानकारी दी गई कि ‘संयुक्त तैयारियों के माध्यम से India की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने’ के उद्देश्य से ‘एक्सरसाइज सी विजिल-26’ के लिए मुख्य योजना सम्मेलन New Delhi में आयोजित किया गया.
इस सम्मेलन की अध्यक्षता वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, डीसीएनएस ने की. इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, डीएमए, गृह मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारतीय थलसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, बीएसएफ, मत्स्य पालन विभाग, डीजीएलएल, आईडब्ल्यूएआई, डीजीएमए, एनएससीएस, डीआरआई, राज्य समुद्री सुरक्षा समन्वयकों और राज्य प्रशासनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
चर्चाओं का मुख्य केंद्र विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, परिचालन तालमेल और तैयारियों को बेहतर बनाना था. इसके साथ ही, India की तटीय रक्षा संरचना और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘संपूर्ण-Government दृष्टिकोण’ को फिर से दोहराया गया.
दरअसल, एक्सरसाइज सी विजिल भारतीय नौसेना का एक प्रमुख तटीय रक्षा अभ्यास है, जिसमें देश की पूरी तटीय सुरक्षा संरचना की परख की जाती है. इस अभ्यास के जरिए समुद्री खतरों से निपटने की तैयारियों को मजबूत किया जाता है.
एक अन्य पोस्ट में भारतीय नौसेना ने बताया कि India और श्रीलंका के बीच दोस्ती और समुद्री सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है. भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी कोलंबो पहुंचे, जहां श्रीलंकाई नौसेना ने उनका औपचारिक स्वागत किया.
पोर्ट कॉल के दौरान पेशेवर गतिविधियों के हिस्से के रूप में, नौसेना प्रशिक्षण के महानिदेशक और श्रीलंकाई नौसेना के पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर ने जहाजों पर मौजूद समुद्री प्रशिक्षुओं से बातचीत की. इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, प्रशिक्षण और समझ को बढ़ावा देना है.
भारतीय नौसेना लगातार हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ा रही है.
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एससीएच/एबीएम


