लोन के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई नेटवर्थ, सीबीआई ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लोन फ्रॉड मामले में सुभाष चंद्रा के खिलाफ दर्ज किया केस

New Delhi, 5 सितंबर . सीबीआई ने लोन के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई नेट वर्थ के सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कारोबारी सुभाष चंद्रा और सात अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है. इस वजह से एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को कथित तौर पर 1,322 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ. यह जानकारी एक अधिकारी ने Saturday को दी.

आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार से जुड़ी दंडात्मक धाराओं के तहत First Information Report 31 अगस्त को एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की जनरल मैनेजर नीता मेन्घानी की शिकायत पर दर्ज की गई थी. वह Mumbai के कफ परेड स्थित कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करती हैं.

सीबीआई की बैंकिंग सुरक्षा एवं धोखाधड़ी शाखा ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर First Information Report संख्या आरसी0742026ई0007 दर्ज की है, जिसमें कहा गया है कि धोखाधड़ी 2018 से Mumbai और अन्य स्थानों पर घटी है.

First Information Report में नामजद अन्य व्यक्तियों में वसंत सागर प्रॉपर्टीज, चर्चगेट, Mumbai ; पंकज सुरोलिया, निदेशक, वसंत सागर प्रॉपर्टीज; पैन इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर, लोअर परेल, Mumbai ; डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज, लोअर परेल, Mumbai ; अमीश पंड्या, निदेशक, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज; स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स, Mumbai ; और राजीव ढोलकिया, निदेशक, स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स, Mumbai शामिल हैं.

यह शिकायत लोन अकाउंट नंबर 610700003341 और लोन अकाउंट नंबर 610700003500 में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी है, जो सुभाष चंद्र की पर्सनल गारंटी पर लिए गए थे.

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत के अनुसार, लोन अकाउंट नंबर 610700003341 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स को 500 करोड़ रुपए की लोन सुविधा दी गई थी, जबकि लोन अकाउंट नंबर 610700003500 डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स को दिए गए 480 करोड़ रुपए के लोन से संबंधित था.

लोन के दो मामलों का जिक्र करते हुए, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि ‘वसंत सागर लोन सुविधा’ मुख्य रूप से सुभाष चंद्र द्वारा जमा किए गए नेट वर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर दी गई थी. यह सर्टिफिकेट डीजेएम एंड कंपनी ने 28 मार्च, 2018 को जारी किया था और इसमें बताया गया था कि 31 मार्च, 2017 तक उनकी नेट वर्थ 6,197.62 मिलियन डॉलर (59,113.21 करोड़ रुपए) थी.

लोन मंजूर होने के लगभग एक दशक बाद दायर की गई एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत में कहा गया, “इसी तरह, ‘डिजिटल लोन सुविधा’ भी सुभाष चंद्र द्वारा जमा किए गए नेट वर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर दी गई थी. यह सर्टिफिकेट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एमपीजे एंड कंपनी ने 6 जुलाई, 2018 को जारी किया था और इसमें बताया गया था कि उनकी नेट वर्थ 40,562 करोड़ रुपए थी.”

First Information Report में कहा गया, “नीता मेन्घानी से 31 अगस्त,2026 की तारीख वाली एक लिखित शिकायत मिली है. यह शिकायत सुभाष चंद्र और अन्य लोगों के खिलाफ है. इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फंड का गलत इस्तेमाल, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोप हैं. आरोप है कि इन्होंने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लोन लेने के लिए गलत जानकारी दी, जिससे उन्हें गलत तरीके से फायदा हुआ और शिकायतकर्ता को Governmentी पैसे का 1,322 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इस तरह, आरोपी व्यक्तियों/कंपनियों ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की.”

First Information Report दर्ज करने की मंजूरी देते हुए सीबीआई के Police अधीक्षक रोशन लाल यादव ने कहा, “एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से मिली शिकायत से पहली नजर में लगता है कि ऊपर बताए गए आरोपी व्यक्तियों/कंपनियों ने आईपीसी की धारा 120बी के साथ 409, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ 13(1)(डी) और पीसी अधिनियम की धारा 13(1)(ए) (2018 में संशोधित) के तहत अपराध किए हैं. इस कारण एक रेगुलर केस (आरसी) दर्ज किया जा रहा है.”

एबीएस

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