
कोलकाता, 5 सितंबर . पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने Saturday को स्वामी विवेकानंद मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एसवीएमएस) का शुभारंभ किया है. इस दौरान सीएम अधिकारी ने कहा कि राज्य में यह मेधावी युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है.
Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि स्वामी विवेकानंद मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एसवीएमएस) के शुभारंभ के साथ आज पश्चिम बंगाल के मेधावी युवाओं को सशक्त बनाने का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है.
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से, पश्चिम बंगाल के योग्य छात्र जो India और विश्व के प्रमुख संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करेंगे, उन्हें स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी, ताकि वित्तीय बाधाएं उनके सपनों को साकार करने में बाधा न बनें.
उन्होंने कहा कि क्यूएस समग्र रैंकिंग के अनुसार विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए, एसवीएमएस स्वीकृत ट्यूशन फीस और स्वास्थ्य बीमा का 100 प्रतिशत समर्थन प्रदान करेगा. प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को वस्तुनिष्ठ संस्थागत मानदंडों और रैंकिंग के आधार पर स्वीकृत ट्यूशन फीस का 100 प्रतिशत तक प्राप्त होगा.
Chief Minister ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता है कि प्रतिभा, योग्यता और महत्वाकांक्षा न कि वित्तीय सीमाएं यह निर्धारित करें कि एक युवा कितना आगे बढ़ सकता है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से लेकर विश्व तक, हम अपने प्रतिभाशाली युवाओं के साथ खड़े रहेंगे. एक समृद्ध पश्चिम बंगाल की यात्रा हमारे युवाओं के सशक्तिकरण से शुरू होती है.
पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी Government राज्य की शिक्षा प्रणाली को स्वामी विवेकानंद के शिक्षा के विजन के अनुरूप बदलने के लिए प्रतिबद्ध है. यह विजन केवल परीक्षा-केंद्रित पढ़ाई के बजाय चरित्र-निर्माण, मानसिक मजबूती और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है.
राज्य के स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘विद्यासागर शिक्षा सम्मान 2026’ समारोह को संबोधित करते हुए Chief Minister ने कहा कि हाल के वर्षों में स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को धीरे-धीरे शिक्षा प्रणाली से हटा दिया गया है, जिससे इसके मूल मूल्य कमजोर हुए हैं.
अधिकारी ने कहा कि स्वामीजी ने कहा था कि सच्ची शिक्षा व्यक्ति में खुद पर विश्वास जगाती है और उसे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए सशक्त बनाती है. स्वामीजी ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी जोर दिया था. पिछले कुछ वर्षों में, पश्चिम बंगाल में शिक्षा प्रणाली बाधित हुई क्योंकि स्वामीजी की शिक्षाओं को धीरे-धीरे शिक्षा प्रणाली से हटा दिया गया था. अब हमें आधुनिक शिक्षा प्रणाली में तकनीक को अपनाने के साथ-साथ उस भावना को भी पुनर्जीवित करना होगा.
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एमएस/