भारत शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज के तौर पर उभर रहा : उपराष्ट्रपति

New Delhi, 15 सितंबर . India के उपPresident और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यू) के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने Tuesday को New Delhi के सप्रू हाउस में आईसीडब्ल्यू के ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ के तौर पर 25वीं वर्षगांठ के समारोह को संबोधित किया.

उपPresident ने इस बात पर जोर दिया कि इंसानी तरक्की और दुनिया में शांति साथ-साथ चलनी चाहिए और यह तभी मुमकिन है जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी फायदे के लिए मिलकर काम करें.

उपPresident ने ब्रिक्स समिट के सफल आयोजन के लिए विदेश मंत्री और आईसीडब्ल्यएके उपाध्यक्ष डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय की पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि टकराव और विरोधाभासों से जूझ रही दुनिया में, ‘New Delhi लीडर्स डिक्लेरेशन’ को सर्वसम्मति से अपनाना एक बड़ी उपलब्धि थी.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति का पहला मकसद देशों के बीच अच्छे संबंध बनाना है. इंसानी तरक्की और विश्व शांति साथ-साथ चलनी चाहिए, और यह तभी संभव है जब देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और आपसी फायदे के लिए काम करें.

Prime Minister मोदी के नेतृत्व में India की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए उप President ने कहा कि India शांति, तरक्की और खुशहाली के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है. उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात पर जोर दिया और इस सोच को असल में लागू करने के उदाहरण के तौर पर कोविड संकट के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’, India की आपदा-प्रबंधन कोशिशों, ‘लाइफ’ और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी वैश्विक पहलों का जिक्र किया.

उपPresident ने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में India की उपलब्धियों पर जोर देते हुए कहा कि “पारदर्शी पेमेंट सिस्टम से पारदर्शी गवर्नेंस आती है.” उन्होंने कहा कि India आईटीईसी और शैक्षिक सहयोग के जरिए ग्लोबल साउथ के साथ अपनी तकनीकी और संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है, जिसमें जांजीबार में India के बाहर पहला आईटीआई कैंपस भी शामिल है.

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल ने आईसीड्ब्ल्यू की भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. India की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘ग्लोबल साउथ’ और ‘इंडो-पैसिफिक’ प्राथमिकताओं पर रिसर्च को मजबूत करना; साइबर सिक्योरिटी, स्पेस, अहम टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर काम का दायरा बढ़ाना; यूनिवर्सिटी और युवा स्कॉलर्स के साथ जुड़ाव को गहरा करना और दुनिया के मामलों पर भरोसेमंद जानकारी का स्रोत बनना, जिसमें India का अपना सही नजरिया हो.

उपPresident ने कहा कि आईसीडब्ल्यू को ‘विकसित भारत-2047’ के लिए बौद्धिक और संस्थागत रूप से खुद को तैयार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन के लिए दुनिया के सम्मानित केंद्रों में से एक बनने की दिशा में काम करना चाहिए. उन्होंने भरोसा जताया कि काउंसिल अपनी गोल्डन जुबली तक India और शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था में और भी बड़ा योगदान देगी.

उपPresident ने आसीडब्ल्यूए के सफर और विकास को दिखाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और काउंसिल में योगदान के लिए पूर्व महानिदेशकों को स्मृति-चिह्न भेंट किए.

ओपी/पीएम

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