भारत-अफ्रीका के रिश्तों को ऐतिहासिक एकजुटता के नजरिए से देखना काफी नहीं, भविष्य को चाहिए बड़े लक्ष्य : जयशंकर

नई द‍िल्‍ली, 10 अक्टूबर . इथियोपिया के अडवा विजय स्मारक संग्रहालय से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अफ्रीका साझेदारी को वैश्विक दक्षिण की साझा विरासत बताया. उन्होंने अदीस अबाबा में संबोधन के दौरान कहा कि India और अफ्रीका के रिश्तों को सिर्फ ऐतिहासिक एकजुटता के नजरिए से देखना अब काफी नहीं है. हमारे आसपास की दुनिया भी बहुत बदल गई है. इसलिए, हमारे रिश्तों को भी समय के साथ बदलना और आगे बढ़ना चाहिए.

भारतीय व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, एस. जयशंकर ने कहा क‍ि India और अफ्रीका का रिश्ता आधुनिक देशों के बनने के बाद शुरू नहीं हुआ था. इसे सिर्फ कुछ दशकों या यहां तक कि कुछ सदियों में भी नहीं मापा जा सकता. इसकी जड़ें हजारों साल पुरानी हैं. आज की कूटनीतिक भाषा और शब्दावली के अस्तित्व में आने से बहुत पहले हिंद महासागर हमारे लोगों को जोड़ रहा था. व्यापार इस रिश्ते का सिर्फ एक हिस्सा था. लोग एक-दूसरे के यहां जाते थे, विचारों का आदान-प्रदान होता था, भाषाएं एक-दूसरे से मिलती थीं. खान-पान, संगीत, सांस्कृतिक परंपराएं, यहां तक कि धर्म और दर्शन भी समुद्र के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह पहुंचे.

उन्‍होंने कहा क‍ि बाद की सदियों में पश्चिमी India के Gujarat के व्यापारी पूर्वी अफ्रीका के तटों पर एक परिचित उपस्थिति बन गए. भारतीय मूल के समुदाय अफ्रीका में बस गए और उसी तरह अफ्रीकी मूल के समुदाय भारतीय समाज का हिस्सा बने. आज भी India के सिद्दी समुदाय हमें याद दिलाते हैं कि हिंद महासागर कभी सिर्फ दो महाद्वीपों को अलग करने वाला जल क्षेत्र नहीं था. यह लोगों को जोड़ने वाला एक मार्ग था. आधुनिक कूटनीति के विकसित होने से पहले ही यह हमें जोड़ चुका था.

जयशंकर ने कहा क‍ि इसके बाद एक कठिन और दर्दभरा दौर भी आया. India और अफ्रीका के कई देशों ने औपनिवेशिक शासन का अनुभव किया. अर्थव्यवस्थाओं और सीमाओं को बाहरी ताकतों के हितों के अनुसार बदला गया. संसाधनों का दोहन किया गया. स्थानीय संस्थाओं और परंपराओं को कमजोर किया गया. कई बार लोगों की गरिमा और अधिकारों को भी नजरअंदाज किया गया. लेकिन इसी साझा पीड़ा से एक मजबूत एकजुटता भी पैदा हुई. India ने अफ्रीका के स्वतंत्रता संघर्ष को सहानुभूति के साथ देखा, क्योंकि हम खुद भी ऐसे ही अनुभवों से गुजरे थे. वहीं अफ्रीका, India की आजादी की कहानी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया.

संबोधन के दौरान व‍िदेश मंत्री ने कहा क‍ि India ने हमेशा उपनिवेशवाद और रंगभेद का विरोध किया. हमारे लिए अफ्रीका की स्वतंत्रता कोई दूर का भू-Political मुद्दा नहीं था. यह हमारी अपनी आजादी की अधूरी लड़ाई का ही एक हिस्सा था. जैसे-जैसे अफ्रीकी देशों को स्वतंत्रता मिली, यह एकजुटता और मजबूत होती गई.

India और अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने की परंपरा विकसित की, जो आज भी जारी है. हमने उपनिवेशवाद के खिलाफ आवाज उठाई. हमने रंगभेद का विरोध किया. हमने देशों की समान संप्रभुता का समर्थन किया. हमने मानव गरिमा के पक्ष में खड़े होकर संघर्ष किया. और हमने यह भी कहा कि जो देश औपनिवेशिक शासन से आजाद हुए हैं, उन्हें एक प्रकार की निर्भरता से निकलकर किसी दूसरी निर्भरता में नहीं फंसना चाहिए. यही सोच और यही विश्वास आज भी हमारी विदेश नीतियों में गहराई से मौजूद है.

जयशंकर ने कहा क‍ि तब से बहुत कुछ बदल चुका है. अफ्रीका बदला है. India बदला है. हमारे आसपास की दुनिया भी गहरे स्तर पर बदल गई है. इसलिए हमारे रिश्तों को भी समय के साथ आगे बढ़ना होगा. अब India और अफ्रीका के संबंधों को सिर्फ ऐतिहासिक एकजुटता की भाषा में समझाना पर्याप्त नहीं है. इतिहास ने हमें आपसी विश्वास दिया है, लेकिन भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य और नई सोच की जरूरत है.

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एवाई/एबीएम

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