
New Delhi, 14 सितंबर . हर साल 15 सितंबर को नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. यह दिन India के महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के मौके पर मनाया जाता है. इंजीनियरिंग की दुनिया में उनके योगदान को आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है. उन्होंने सिर्फ बांध और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान नहीं दिया, बल्कि उनकी सोच में देश के विकास की एक बड़ी तस्वीर दिखाई देती थी.
इंजीनियरिंग सिर्फ मशीन, पुल या इमारत बनाने का काम नहीं है. सही मायने में इंजीनियर वह है, जो किसी समस्या को समझे और उसका ऐसा समाधान निकाले, जिसका फायदा लंबे समय तक लोगों को मिले. आज India जिस तेजी से तकनीक, बुनियादी ढांचे और डिजिटल व्यवस्था में आगे बढ़ रहा है, उसमें इंजीनियरों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
विश्वेश्वरैया ने बाढ़ नियंत्रण, जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया. 1908 में हैदराबाद में आई भीषण बाढ़ के बाद उन्होंने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े समाधान तैयार करने में योगदान दिया. जल प्रबंधन के लिए जलाशयों और बांधों की योजना पर जोर दिया गया. बाद में मैसूर के मुख्य अभियंता के रूप में उन्होंने कृष्ण राजा सागर यानी केआरएस बांध के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस परियोजना ने सिंचाई और कृषि के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने में मदद की.
उनकी सोच का असर सिर्फ इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने औद्योगिकीकरण, शिक्षा और बेहतर प्रशासन को भी देश के विकास के लिए जरूरी माना. उनकी किताबों में भी India की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति को लेकर उनकी सोच दिखाई देती है. 1955 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक India रत्न से सम्मानित किया गया.
आज जब India तेजी से तकनीक की ओर बढ़ रहा है, इंजीनियरों की जिम्मेदारी भी पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो गई है. देश में हाईवे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, रेलवे, पुल, बंदरगाह और बिजली परियोजनाओं से लेकर स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं. इन परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें जमीन पर उतारने में इंजीनियरों की अहम भूमिका है.
इंजीनियरिंग का दायरा अब सिर्फ ईंट, सीमेंट और मशीनों तक सीमित नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय इंजीनियर तेजी से काम कर रहे हैं. अंतरिक्ष और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी इंजीनियर नई तकनीकों को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
डिजिटल इंडिया इसका एक बड़ा उदाहरण है. आज आधार, यूपीआई और डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल सेवाओं ने करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के काम को आसान बनाया है. इनके पीछे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी भूमिका है. India की डिजिटल व्यवस्था को दुनिया में मिली पहचान में इंजीनियरों की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
दूसरी तरफ देश तेजी से ग्रीन टेक्नोलॉजी की ओर भी बढ़ रहा है. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में इंजीनियर नई तकनीक और समाधान तैयार कर रहे हैं. पीएम सूर्य घर, पीएम-कुसुम और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों में भी तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका अहम है. आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास की जरूरत और बढ़ने वाली है.
Government की तरफ से इंजीनियरिंग शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी जैसे संस्थान नई पीढ़ी के इंजीनियर तैयार कर रहे हैं. अटल इनोवेशन मिशन, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने के बजाय नई तकनीक विकसित करने और अपना उद्यम शुरू करने के अवसर भी दे रहे हैं.
डीप-टेक के क्षेत्र में भी India अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका सीधा फायदा इंजीनियरिंग छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को मिल सकता है.
आज India ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ने की बात कर रहा है. ऐसे में इंजीनियर सिर्फ विकास की परियोजनाओं को पूरा करने वाले पेशेवर नहीं हैं, बल्कि वे देश की भविष्य की जरूरतों के समाधान तैयार करने वाले लोग हैं. बेहतर सड़क से लेकर स्मार्ट शहर तक, डिजिटल भुगतान से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक और स्वच्छ ऊर्जा से लेकर आधुनिक रक्षा तकनीक तक—हर क्षेत्र में इंजीनियरिंग की छाप दिखाई देती है.
इसलिए राष्ट्रीय इंजीनियर्स डे सिर्फ एक महान इंजीनियर की जयंती मनाने का दिन नहीं है. यह उन लाखों इंजीनियरों के योगदान को पहचानने का मौका भी है, जो पर्दे के पीछे रहकर देश के विकास की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं.
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पीआईएम/वीसी