
गढ़चिरौली, 15 सितंबर . केंद्र Government की योजना के तहत ‘मागेल त्याला सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना’ का लाभ मिलने के बाद कोरची तहसील के प्रगतिशील किसान अशोक कराडे की खेती में बड़ा बदलाव आया है.
कराडे ने बताया कि पहले वह मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहते थे और साल में केवल एक ही फसल ले पाते थे. खेत में विद्युत कनेक्शन होने के बावजूद कोरची तहसील में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण सिंचाई करना उनके लिए बड़ी परेशानी थी. बिजली कब आएगी, इसका कोई भरोसा नहीं रहता था, जिसके कारण समय पर फसल को पानी देना मुश्किल हो जाता था.
अशोक कराडे ने को बताया कि उन्हें ‘मागेल त्याला सौर ऊर्जा योजना’ के तहत खेत के लिए 3 एचपी की सौर मोटर, सोलर पैनल और बोर का पूरा सेटअप मिला है. उन्हें सौर पंप लगने के बाद बिजली आने-जाने की चिंता नहीं रहती. अब सौर ऊर्जा के माध्यम से खेत में आसानी से सिंचाई कर पा रहे हैं. इसका सीधा फायदा खेत की फसल उत्पादन क्षमता पर हुआ है.
उन्होंने बताया कि पहले वे केवल बारिश के मौसम में धान की एक फसल लेते थे, लेकिन सौर पंप मिलने के बाद अब दूसरी फसल लेने की भी सुविधा उपलब्ध हुई है. सिंचाई की सुविधा बढ़ने से खेती का क्षेत्र और उत्पादन दोनों बढ़ाने का अवसर मिला है. साथ ही, सौर ऊर्जा के कारण बिजली के बिल से भी राहत मिली है.
अशोक कराडे ने कहा कि इस योजना का लाभ मिलने से उनकी खेती की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है. पहले खेती से होने वाली आमदनी काफी सीमित थी, लेकिन अब वे लगभग 3.5 लाख रुपए तक की फसल उपज लेने में सक्षम हो रहे हैं. धान की खेती के साथ उन्होंने अपने खेत में विभिन्न प्रकार के फलदार और अन्य पेड़ भी लगाए हैं.
प्रगतिशील किसान अशोक कराडे ने कहा कि सौर ऊर्जा योजना किसानों के लिए बेहद लाभदायक है. जिन किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की अनियमितता का सामना करना पड़ता है, उनके लिए सौर पंप एक प्रभावी विकल्प है. उन्होंने कोरची तहसील के अन्य किसानों से भी अपील की कि वे योजना की पात्रता और उपलब्धता की जानकारी लेकर लाभ उठाएं और खेती को सिंचाई के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाएं.
कराडे ने बातचीत के दौरान कहा कि जब से सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना का लाभ मिला है, तब से फसलों से अच्छा उत्पादन हो रहा है. अब तक किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं आई है. सोलर पैनल और बोर लगाने के बाद से सिंचाई की कमी नहीं हो रही है. सोलर पैनल लगाने के बाद से बिजली के बिल से मुक्ति मिल गई है. अब फसलों को पानी देने के लिए मौसम और बिजली पर निर्भरता खत्म हो गई है.
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसी प्रकार की मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा. हमने आवेदन के समय जरूरी कागजात देना था. हमें इसके लिए करीब 11 हजार रुपए भरना था. इसके बाद विभाग की तरफ से जमीन का सर्वे हुआ और कुछ समय बाद सोलर पैनल लगा दिया गया. मैं करीब आठ एकड़ जगह में पांच एकड़ में धान की पैदावार करता हूं. धान की खेती के बाद जो जगह बचती है उसमें फलों की पैदावार करते हैं. फल के बगीचे में करीब छह प्रकार के आम के पेड़ लगे हैं.
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एएसएच/एबीएम