आगरा : शादी के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह, वकील चला रहा था कॉल सेटर, नौ गिरफ्तार

New Delhi, 15 सितंबर . सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर Police ने आगरा में चल रहे एक पैन-इंडिया मैट्रिमोनियल साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह ‘शादीपार्टनर डॉट कॉम’ नाम की फर्जी वेबसाइट की आड़ में शादी के इच्छुक लोगों, खासकर पुरुषों से ठगी कर रहा था. Police ने मामले में रैकेट के मास्टरमाइंड वकील अमित कुमार समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है.

यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज एक शिकायत के बाद शुरू हुई. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे ‘शादीपार्टनर डॉट कॉम’ पर रिश्ते के नाम पर 15,000 रुपए ठगे गए. जांच के बाद साइबर सेंट्रल थाने में बीएनएस की धारा 318(4)/317(5)/61(2)/3(5) के तहत First Information Report नंबर 78/2025 दर्ज की गई.

जांच में पता चला कि ठगी की रकम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक करंट अकाउंट में जा रही थी, जो ‘मेसर्स शादी पार्टनर’ के नाम पर था. इस अकाउंट की मालिक जया शाक्य उर्फ शशि थी. एनसीआरपी डेटा खंगालने पर इसी अकाउंट से देशभर में छह शिकायतें जुड़ी मिलीं.

4 सितंबर 2026 को Police ने आगरा के सिकंदरा स्थित रामाजी धाम अपार्टमेंट में छापा मारा. वहां एक अवैध टेली-कॉलिंग कॉल सेंटर चल रहा था. मौके से मैनेजर जया शाक्य और आठ महिला टेलीकॉलर्स को पकड़ा गया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे रैकेट का असली मालिक 29 साल का वकील अमित कुमार है.

Police के मुताबिक, मास्टरमाइंड अमित कुमार बीए एलएलबी है और उसने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल कर बचने का पूरा जाल बुन रखा था. उसने जया शाक्य के नाम पर प्रोपराइटरशिप फर्म ‘मेसर्स शादी पार्टनर’ बनाई, एमएसएमई और यूपी लेबर डिपार्टमेंट में रजिस्ट्रेशन कराया और अपनी कंपनी नेटनेक्सिस सॉल्यूशंस (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के साथ फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट किया. सभी बैंक अकाउंट, सिम कार्ड महिला मैनेजर के नाम पर थे, जबकि खुद को वह सिर्फ ‘लीगल एडवाइजर’ बताता था.

छापेमारी की भनक लगते ही अमित कुमार अपना मोबाइल बंद कर अंडरग्राउंड हो गया. तकनीकी निगरानी के जरिए 8 सितंबर को उसे आगरा के काला कुंज इलाके में पकड़ा गया. उस वक्त वह ‘एडवोकेट’ स्टिकर लगी काली कार में जा रहा था. उसने बार काउंसिल के कागजात दिखाकर छूट मांगी, लेकिन डिजिटल सबूतों के सामने उसकी पोल खुल गई.

गिरोह की रणनीति ‘छोटा धोखा, बहुतों के साथ धोखा’ थी. वे एक पीड़ित से 15,000 रुपए से ज्यादा नहीं लेते थे ताकि वह Police में शिकायत न करे. वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपनी वेबसाइट से शादी के इच्छुक पुरुषों के नंबर जुटाना, फिर महिला कॉलर्स द्वारा आकर्षक दुल्हनों की फर्जी तस्वीरें वाट्सअप पर भेजते थे. भरोसा जीतने के लिए दूसरी महिला स्टाफ होने वाली दुल्हन बनकर कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात भी करती थी. फिर रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रोफाइल एक्टिवेशन, कॉन्टैक्ट अनलॉक जैसे नामों पर 2,500 से 15,000 रुपए वसूले जाते थे. कुछ दिन बाद मांगलिक दोष, परिवार की असहमति जैसे बहानों से रिश्ता तोड़ दिया जाता था.

भर्ती वर्कइंडिया और अपना ऐप से की जाती थी. टेली-कॉलर्स को 6,000-7,000 रुपए सैलरी और ठगी की रकम पर 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था. हर कॉलर को महीने में कम से कम 15,000 रुपए ठगने का टारगेट दिया जाता था. Police ने एक कार, 50,000 रुपए नकद, सात डेस्कटॉप सीपीयू और 47 मोबाइल फोन बरामद किए हैं.

यह ऑपरेशन सब इंस्कपेक्टर गौरव सिंह, हेड constable भरत और constable धर्मेंद्र की टीम ने एसएचओ साइबर सेंट्रल की देखरेख में किया. Police का कहना है कि हजारों लोग इस ठगी के शिकार हो चुके हैं, जिन्हें पता भी नहीं कि वे ठगे गए हैं.

एससीएच/एबीएम

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