
ढाका, 3 अक्टूबर . बांग्लादेश के तंगेल जिले के मिर्जापुर उपजिला में आगामी दुर्गा पूजा से पहले एक मंदिर में बनाई जा रही सात मूर्तियां अज्ञात लोगों ने खंडित कर दीं. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमलों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह घटना सामने आई है.
मंदिर प्रशासन और Police के अनुसार, मिर्जापुर के जमुरकी पश्चिमपाड़ा इलाके में Wednesday रात से Thursday सुबह के बीच मूर्तियों में तोड़फोड़ की गई.
स्थानीय लोगों ने बताया कि जमुरकी आर्य समिति के तहत इस मंदिर में करीब 85 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है.
मंदिर में इस साल दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही थीं. मुख्य देवी दुर्गा की मूर्ति समेत सात मूर्तियां लगभग तैयार हो चुकी थीं और केवल रंगाई का काम बाकी था.
जमुरकी आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बकाली ने बताया, “हम Wednesday रात करीब 10 बजे तक मंदिर में थे. इसके बाद घर चले गए. Thursday सुबह जब मंदिर लौटे तो मूर्तियां टूटी हुई मिलीं.”
उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि यह किसने किया. हमने Police में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. अब हमारी मांग है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां जिम्मेदार लोगों का पता लगाएं और उन्हें कानून के दायरे में लाएं.”
घटना की पुष्टि करते हुए तंगेल के सहायक Police अधीक्षक अदनान मुस्तफिज ने बताया कि कुछ मूर्तियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मिली हैं.
उन्होंने कहा, “हम दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए जांच कर रहे हैं. जरूरी सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है.”
रिपोर्ट में इस घटना को बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों को लेकर जताई जा रही चिंताओं से जोड़ा गया है.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पिछले महीने फरीदपुर शहर के उत्तर कालीबाड़ी मंदिर से देवी काली की मूर्ति के साथ कई आभूषण और धार्मिक वस्तुएं चोरी हो गई थीं.
रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी हुई वस्तुओं में देवी काली की मूर्ति, उस पर चढ़ाए गए करीब 7 से 8 तोला सोने के आभूषण, भगवान विष्णु, राधा-कृष्ण और मनसा की पीतल की छोटी मूर्तियां शामिल थीं.
इसके अलावा शिवलिंग के चारों ओर रखा करीब 8 से 10 तोला वजन का चांदी का सांप भी चोरी होने की बात कही गई थी.
हाल ही में अवामी लीग ने 2001 से 2006 तक रही बीएनपी-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन Government के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि उस अवधि में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ जो घटनाएं हुई थीं, वैसी स्थिति 2026 में फिर दिखाई दे रही है.
अवामी लीग ने मंदिरों पर हमले, घरों में आगजनी, जमीन कब्जाने, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और हिंदुओं के देश छोड़ने के लिए मजबूर होने के आरोप लगाए थे. ये अवामी लीग के आरोप हैं और संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है.
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एएमटी/डीकेपी