बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार की कैद को मानवाधिकार समूहों ने बताया ‘राजनीति से प्रेरित’

पेरिस, 7 नवंबर . अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश के एक वरिष्ठ पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की कड़ी निंदा की है. संगठन ने इस कदम को ‘Political उत्पीड़न’ करार देते हुए कहा कि पत्रकार की Political पहचान और पेशेवर पृष्ठभूमि के कारण उन्हें दंडित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग किया गया है.
बांग्लादेश की एक अदालत ने डीबीसी न्यूज के चेयरमैन और अपदस्थ Prime Minister शेख हसीना के पूर्व सूचना सलाहकार, इकबाल सोभन चौधरी को जुलाई 2024 के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े एक हत्या मामले में जेल भेज दिया है.
बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Governmentी अभियोजक मुहम्मद शम्सुदोहा चौधरी ने बताया कि जांच अधिकारी द्वारा दायर एक याचिका के बाद, Thursday को ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सारा फरजाना हक ने यह आदेश जारी किया.
फ्रांस स्थित ‘जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश’ (जेएमबीएफ) ने आरोप लगाया कि सोभन चौधरी को हत्या मामले में सिर्फ इसलिए फंसाया गया और जेल भेजा गया, क्योंकि (माना जाता है) वे अवामी लीग का समर्थन करते हैं और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के आदर्शों से जुड़े हैं.
गहरी चिंता जताते हुए, इस मानवाधिकार संगठन ने कहा कि एक पत्रकार की आवाज दबाने और उसकी Political पहचान को आपराधिक रूप देने के लिए मर्डर केस का इस्तेमाल एक हथियार की तरह किया जा रहा है. संगठन ने कहा कि अदालत के सामने पेश किए गए विवरण में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो हत्या में उनकी सीधी संलिप्तता या जिम्मेदारी को साबित करता हो, या यह दिखाता हो कि उन्होंने ऐसा करने के लिए कोई निर्देश दिया था.
संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी पूर्व Government के साथ Political जुड़ाव या पेशेवर संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को किसी आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके; इसके लिए ठोस सबूत होने चाहिए.
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा, “हम वरिष्ठ पत्रकार इकबाल सोभन चौधरी की Political रूप से प्रेरित गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजने की कड़ी निंदा करते हैं. उत्पीड़न का यह चिंताजनक सिलसिला मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम Government के समय शुरू हुआ था और अब भी बांग्लादेश में बुनियादी आजादी के लिए खतरा बना हुआ है. जेएमबीएफ का मानना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया है क्योंकि माना जाता है कि वे बांग्लादेश अवामी लीग से जुड़े हैं और 1971 के मुक्ति संग्राम के आदर्शों का समर्थन करते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “Political विचारों के लिए सजा देने और पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए आपराधिक कानूनों का हथियार की तरह इस्तेमाल करना, राज्य की सत्ता का घोर दुरुपयोग है. हम उनकी तुरंत रिहाई और इस Political उत्पीड़न को खत्म करने की मांग करते हैं.”
जेएमबीएफ ने बांग्लादेश Government से मांग की है कि वह इकबाल सोभन चौधरी को तुरंत रिहा करे, उनकी “Political रूप से प्रेरित” हिरासत और मुकदमे को खत्म करें, और उनके Political जुड़ाव, पेशेवर पद, या 1971 के मुक्ति संग्राम के आदर्शों के समर्थन के आधार पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस लें.
मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत और वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता संगठनों से आग्रह किया है कि वे बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष इस मामले को उठाएं, वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ मुकदमा चलाने के आधार बने सबूतों को सार्वजनिक करने की मांग करें और पूरी कानूनी कार्यवाही पर कड़ी नजर रखें.
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