फ्रांस में संगठित ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ कर रहे हिंसक प्रदर्शन, ये देशद्रोह: मैक्रों

पेरिस, 22 अक्टूबर . फ्रांसीसी President मैक्रों ने गल्फ दौरे से लौटकर मंत्रियों और सिक्योरिटी काउंसिल के साथ बैठक की. इसमें फ्रांसीसी शहरों की सड़कों पर होने वाली अप्रिय घटनाओं को कैसे रोका जाए इसे लेकर मंथन हुआ. बैठक में ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ (कट्टर वामपंथी) समूहों की ‘हरकतों’ को राष्ट्रविरोधी मानते हुए निंदा की गई. साथ ही मैक्रों ने संकेत दिया कि भविष्य में वो ट्रेड यूनियनों के अलावा किसी और को प्रदर्शन न करने देने पर विचार कर रहे हैं.
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मैक्रों ने स्वीकार किया कि पिछले सप्ताहांत हुए विरोध प्रदर्शनों से निपटने में कुछ “कमियां” रह गई थीं, क्योंकि स्थिति कुछ हद तक “अचानक” सामने आई थी. उनका कहना है कि Government को इससे सबक लेना चाहिए और इस सप्ताहांत होने वाली घटनाओं के दौरान इसे लागू करना चाहिए.
उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन को अपने स्तर पर कदम उठाने का अधिकार दिया गया है, जैसे कि लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाना. साथ ही, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए न्यायिक प्रणाली को भी “पूरी तरह से तैयार” रखा गया है.
President ने न्याय मंत्रालय की उस मांग का समर्थन किया है, जिसमें दंगों में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा की बात कही गई है.
इसके बाद उन्होंने दंगों के बारे में अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया. उन्होंने कहा, “हम देख रहे हैं कि संगठित ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ (कट्टर वामपंथी) समूह Political और देशद्रोह कर रहे हैं, जिनका मकसद रिपब्लिक को गिराना है. ये समूह खुद भी खुलेआम ऐसी हरकतों की जिम्मेदारी लेते हैं, जिनमें अत्यधिक और भीषण हिंसा शामिल होती है.”
मैक्रों ने कहा कि Government दंगों को रोकने के लिए “पूरी दृढ़ता” दिखाएगी और व्यवस्था बहाल करने के लिए “कई मोर्चों पर” काम करेगी.
उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों द्वारा आयोजित वैध प्रदर्शनों की “कानून के तहत समीक्षा” की जाएगी और उन्हें इस तरह से होने दिया जाएगा ताकि वे सुरक्षित रूप से संपन्न हो सकें. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेड यूनियनों द्वारा आयोजित न किए गए अन्य किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शनों पर, “जहां तक संभव हो”, “पूरी तरह से प्रतिबंध” लगा दिया जाएगा.
इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले हफ्ते Prime Minister लेकोर्नू छात्र संगठनों के साथ मुलाकात करेंगे, ताकि उनकी “जायज मांगों और शिकायतों” पर काम किया जा सके.
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