फॉर्म-47 से पत्रकार के सवाल तक: यूएन में भारत को धमकी देकर घिरे शहबाज, सवाल आया तो चुपचाप निकल गए

न्यूयॉर्क, 26 सितंबर . संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से Pakistanी Prime Minister शहबाज शरीफ ने India को खूब निशाने पर लिया. कश्मीर को जगलर वेन (गले की नस) बताया, सिंधु नदी पानी पर पाबंदी का रोना रोया और जैसा वो हर मंच से करते हैं युद्ध की गीदड़भभकी भी दी. जिसका उन्हें राइट टू रिप्लाई के जरिए माकूल जवाब भी मिला, उन्हें ‘फॉर्म 47’ याद दिला दिया गया. हालांकि इससे पहले जब एक पत्रकार ने उनसे आतंकवाद और हाफिज सईद को लेकर सीधे सवाल किए, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई. शहबाज सवालों का जवाब दिए बिना आगे बढ़ गए.

शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए सिंधु जल संधि का दुखड़ा खूब रोया. उन्होंने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल Pakistan के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है. India पर पानी को ‘हथियार’ बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नदियों को देशों को जोड़ना चाहिए, बांटना नहीं.

फिर अपनी ही बात में उलझते हुए India को युद्ध की धमकी भी दे डाली. यानी एक तरफ शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र में शांति और संवाद की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ India को पानी के मुद्दे पर युद्ध की चेतावनी देने से भी बाज नहीं आए.

शहबाज के भाषण का एक दूसरा पहलू भी सामने आया. India ने उनके भाषण के बाद संयुक्त राष्ट्र में ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल किया. यूएन में India की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आईना दिखाने का काम किया. Pakistan के दावों का जवाब देते हुए उसके Political और आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए. इसी क्रम में Pakistan की चुनावी राजनीति में विवाद का प्रतीक बन चुके फॉर्म-47 का मुद्दा भी चर्चा में आया.

फॉर्म-47 का विवाद Pakistan के 2024 के आम चुनाव के बाद सामने आया था. चुनाव परिणामों को लेकर विपक्षी दलों और उम्मीदवारों ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में शुरुआती परिणामों और बाद में घोषित नतीजों के बीच अंतर के आरोप लगाए थे. यही वजह है कि Pakistan की मौजूदा सत्ता की Political वैधता को लेकर बहस में फॉर्म-47 का नाम लगातार आता रहा है. ये वो देश है जहां लोकतंत्र का नहीं सेना के जरिए राज चलता है; उनकी कठपुतलियां बदलती रहती हैं, लेकिन डोर उनके हाथ में ही होती है. 27वें संविधान संशोधन और ‘वास्तविक शासक’ को दी गई छूट इसका उदाहरण है.

भारतीय अफसर पेटल गहलोत ने 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के Pakistan में रहने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर Pakistan के दावों को उसके रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. India ने Pakistan में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा उठाया. रावलकोट से पूछे कि कैसे उनके अधिकारों से उन्हें दूर रखा जा रहा है. इस तरह गहलोत ने ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और नफरत के Pakistan के रिकॉर्ड का हवाला दिया.

शहबाज शरीफ के Pakistan की जीत के दावे पर पेटल गहलोत ने कहा, “पूरी दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें और सबूत मौजूद हैं कि भारतीय कार्रवाई में Pakistan के सैन्य एयरबेस तबाह हुए थे. अगर तबाह रनवे और जले हैंंगर Pakistan को जीत लगते हैं, तो वह इस ‘काल्पनिक जीत’ का जश्न मनाने के लिए स्वतंत्र है. Pakistan की सेना ने खुद सीजफायर की मांग की थी और यह पूरी दुनिया जानती है.”

ये India का यूएनजीए में करारा जवाब था. अब तस्वीर को थोड़ा पीछे से देखें तो शहबाज शरीफ की यूएन यात्रा में घटनाओं की एक दिलचस्प कड़ी दिखाई देती है.

पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में India को पानी के मुद्दे पर चेतावनी दी. फिर कश्मीर को Pakistan की ‘गले की नस’ बताया. India ने जवाब देने के अधिकार के तहत उनके दावों पर पलटवार किया और फॉर्म-47 समेत Pakistan की Political व्यवस्था को सवालों के घेरे में रखा.

इससे पहले यूएन मुख्यालय में दाखिल होते हुए भी उनसे जो पूछा गया उसने Pakistan की कलई खोलकर रख दी. जब पत्रकारों ने शहबाज शरीफ को कैमरे के सामने घेरा तो सवाल India के नहीं, बल्कि Pakistan के अपने आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर था.

एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि Pakistan आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा. शहबाज शरीफ ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए. इसके बाद हाफिज सईद को लेकर भी उनसे सवाल किया गया. इस सवाल पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

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केआर/

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