
Bengaluru, 31 अगस्त . कभी Bengaluru की दुकानदार टीएस निंगम्मा और उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल था. लेकिन, Prime Minister स्वनिधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत मिले ऋण ने उनकी जिंदगी बदल दी.
आज निंगम्मा और उनके पति का इडली, डोसा और सांभर का कारोबार अच्छी तरह चल रहा है और परिवार आर्थिक रूप से पहले से कहीं अधिक सशक्त हो चुका है.
निंगम्मा की प्रेरणादायक कहानी का उल्लेख Sunday को Prime Minister Narendra Modi ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी किया. उन्होंने उनकी उद्यमशीलता के जज्बे की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.
Prime Minister ने कहा कि निंगम्मा ने पीएम स्वनिधि योजना की मदद से अपनी रेहड़ी को बेहतर बनाया और अपने मेन्यू में कई नए व्यंजन जोड़े. इसके बाद ग्राहकों की संख्या बढ़ी, आमदनी में सुधार हुआ और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई. अब वह अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला पा रही हैं.
निंगम्मा ने से बातचीत में बताया कि पीएम स्वनिधि योजना उनके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही. हमें इस योजना से बहुत फायदा हुआ. हमने 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपए का ऋण लिया. इससे हमने दुकान को बेहतर बनाया. आमदनी से बच्चों की पढ़ाई कराई और जीवन को व्यवस्थित किया. शुरुआत में दुकान शुरू करने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे.
उन्होंने कहा, ”ऋण लेने से पहले मेरे पास दुकान लगाने के लिए कुछ नहीं था. घर के बर्तनों में खाना बनाकर एक मेज पर रखकर बेचती थी. पहला 10 हजार रुपए का ऋण मिलने पर मैंने एक ठेला और नए बर्तन खरीदे. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा, बच्चों की स्कूल फीस भरी और फिर 20 हजार रुपए का ऋण मिला. उस पैसे से दुकान का विस्तार किया, कुछ कर्मचारियों को काम पर रखा और व्यवसाय को आगे बढ़ाया.”
Prime Minister द्वारा ‘मन की बात’ में नाम लिए जाने पर निंगम्मा ने खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके और परिवार के लिए बहुत बड़ा सम्मान है. मैं बहुत खुश हूं. Prime Minister ने हमारे प्रयासों को पहचान दी, इससे पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. मेरे भाई, भाभी, माता-पिता सभी बेहद खुश हैं.”
पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई थी. यह सड़क किनारे कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराने की एक विशेष पहल है. समय के साथ यह योजना केवल ऋण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि लाखों छोटे कारोबारियों के लिए वित्तीय सशक्तीकरण, डिजिटल समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है.
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एएमटी/एबीएम