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Thursday, 5 November 2026
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पहले चुनाव में गुलाम नबी आजाद को दी पटखनी, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सियासत में लिखी बड़ी इबारत

पहले चुनाव में गुलाम नबी आजाद को दी पटखनी, Union Minister जितेंद्र सिंह ने सियासत में लिखी बड़ी इबारत

New Delhi, 5 नवंबर . साल 2014 में जब केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली Government बनी तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में जम्मू-कश्मीर से एक ऐसे नेता की एंट्री हुई, जिन्हें देश की जनता शायद पहले इतने बड़े राजनेता के तौर पर नहीं जानती थी. पहले मोदी मंत्रिमंडल में एक अलग जगह पाने वाले वह राजनेता हैं- डॉ. जितेंद्र सिंह.

6 नवंबर को 1956 को जन्मे जितेंद्र सिंह ने 26 मई 2014 को बतौर केंद्रीय राज्यमंत्री के तौर शपथ ली थी. केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद जितेंद्र सिंह अक्सर Prime Minister Narendra Modi के साथ अहम मुद्दों पर बातचीत करते और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनके साथ रहते थे. पिछले एक दशक से अधिक समय में जब Prime Minister के तौर पर Narendra Modi का यह तीसरा कार्यकाल है, जितेंद्र सिंह मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हुए हैं. यह दिखलाता है कि देश की बागडोर संभालने के बाद पीएम मोदी ने उन्हें अपने कितने करीब रखा है.

देश के Prime Minister के तौर पर शपथ लेने के बाद Narendra Modi ने न सिर्फ जितेंद्र सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में अहमियत दी बल्कि उन्हें जम्मू-कश्मीर के हालातों को दुरुस्त करने के लिए घाटी के अंदर विकास को एक नए आयाम तक पहुंचाने के लिए ‘फ्री हैंड’ भी दिया.

जितेंद्र सिंह की जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि एक समय तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया था लेकिन राजनीति में उतरने पर जितेंद्र सिंह का पहला मुकाबला गुलाम नबी आजाद के साथ ही था. इस चुनावी लड़ाई में जितेंद्र सिंह ने बाजी मारी.

2014 के Lok Sabha चुनाव में जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से चुनाव में उतरे थे, जिसमें उन्होंने गुलाम नबी आजाद को 60 हजार से अधिक वोटों से अंतर से शिकस्त दी थी. भाजपा के साथ राजनीति में कदम रखने वाले जितेंद्र सिंह 2014 से ही Lok Sabha में उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

India Government में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों को संभाला है. वर्तमान में, वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय व पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्यरत हैं. इसके साथ ही, वे Prime Minister कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. जितेंद्र सिंह को जम्मू-कश्मीर और India के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए किए गए उनके प्रयासों के लिए भी काफी सम्मान दिया जाता है.

Union Minister के रूप में उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में India की प्रगति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. उनके नेतृत्व ने India के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों, वैज्ञानिक संस्थानों और लोक प्रशासन में सुधारों को मजबूत करने में योगदान दिया है.

शुरुआती जीवन में जितेंद्र सिंह की रुचि मेडिकल क्षेत्र में रही. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद 1978 में यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास (चेन्नई) से एमबीबीएस की शिक्षा पूरी की. इसके बाद 1984 में उन्होंने जम्मू के Governmentी मेडिकल कॉलेज से एमडी की डिग्री ली.

जितेंद्र सिंह मधुमेह (डायबिटीज) के एक जाने-माने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ हैं. वे मधुमेह और एंडोक्रिनोलॉजी के प्रोफेसर, एक प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी, लेखक, कई प्रमुख राष्ट्रीय और दक्षिण एशियाई मधुमेह सम्मेलनों में आमंत्रित विशेषज्ञ और एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिले डोडा के ‘कलोटा’ नामक एक सुदूर गांव से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई.

उन्होंने मेडिकल की डिग्री के बाद मधुमेह रोग के खिलाफ एक मिशन के रूप में काम किया. जितेंद्र सिंह ने शुगर रोगियों के लिए कई किताबें भी लिखीं, जिनमें से कुछ किताबें देश और विदेश के अंदर विख्यात हुईं. इन्हीं से एक किताब ‘डायबिटीज मेड ईजी’ ने खूब तहलका मचाया. 2002 में जब दिल्ली के अंदर बुक फेयर लगा तो इस किताब ने बिक्री के रिकॉर्ड तोड़े. मेडिकल सेवा के अंदर जितेंद्र सिंह को कई बड़े अवॉर्ड मिले.

जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर) की तरफ से उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था. यही वह अवॉर्ड था, जो पूर्व Union Minister गुलाम नबी आजाद ने उन्हें दिया था.

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डीसीएच/पीएम

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