नवरात्रि का पांचवां दिन बेहद खास, संतान सुख के लिए विशेष पूजा विधान : कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी

New Delhi, 15 अक्टूबर . शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. बड़ी संख्या में भक्त मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. पूरे मंदिर परिसर में ‘जय माता दी’ के जयकारे गूंज रहे हैं. इस बीच मंदिर के मुख्य पुजारी ने मां स्कंदमाता की पूजा से जुड़ी मान्यता के बारे में बताया.
कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने से बात करते हुए कहा, “पंचम नवरात्रि पर भगवती स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है. देव सेनापति स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म देने के कारण भगवती स्कंदमाता के नाम से विख्यात हुईं.”
उन्होंने देवी के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया, “भगवती स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं. उनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो हाथों में उन्होंने कमल के फूल धारण किए हुए हैं, एक हाथ में देव सेनापति कार्तिकेय को गोद में लिए हुए हैं और एक हाथ से वे भक्तों को अभय प्रदान कर रही हैं. भगवती स्कंदमाता करुणा और वात्सल्य की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं.”
महंत जी ने बताया कि इस दिन की पूजा का विशेष फल मिलता है. उन्होंने कहा, “उनकी पूजा-अर्चना करने से संतान की प्राप्ति होती है. सिंहासनगता देवी स्कंदमाता यशस्विनी के मंत्रों के साथ उनकी आराधना करने और उन्हें प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से भगवती प्रसन्न होकर संतान का वरदान देती हैं.”
उन्होंने पूजा की विशेष विधि के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “विशेष रूप से उनके हवन में जियापोता, जिसे पुत्रजीवक भी कहा जाता है, का हवन किया जाता है. ऐसा करने से साधक को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है और संतान संबंधी सभी बाधाएं दूर होती हैं.”
नवरात्रि के दौरान मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर महंत सुरेंद्रनाथ ने बताया, “प्रत्येक नवरात्रि के अवसर पर मां कालका के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ आती है. मध्यरात्रि में भगवती की विशेष आरती की जाती है और उसके बाद पट खोल दिए जाते हैं, ताकि भक्त सुचारू रूप से दर्शन कर सकें.”
उन्होंने इस बार की गई विशेष तैयारियों के बारे में कहा, “इस बार भी भक्तों की सुविधा के लिए तीन अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं. पहला मार्ग राम प्याऊ की तरफ से, दूसरा कमल मंदिर की तरफ से और तीसरा वीआईपी दर्शन के लिए बनाया गया है. मंदिर परिसर के अंदर ही अस्थायी Police चौकी का निर्माण किया गया है, जहां अतिरिक्त Police बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात हैं.”
महंत जी ने आगे बताया, “इसके अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवक भी दिन-रात माता की सेवा में लगे रहते हैं, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे आसानी से दर्शन कर सकें. सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर में लगभग 150 cctv कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें हेडकाउंट कैमरे भी शामिल हैं. इन कैमरों से आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी अवांछित व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके.”
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