Skip to content
Friday, 16 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
धर्म,राष्ट्रीय

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना, कालकाजी मंदिर के पुजारी ने बताया महत्व और सिद्ध मंत्र

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना, कालकाजी मंदिर के पुजारी ने बताया महत्व और सिद्ध मंत्र

New Delhi, 16 अक्टूबर . नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है. इस दिन भक्त मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं. कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी ने इस दिन का महत्व बताते हुए कहा कि आज का दिन उन कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष है जो विवाह करना चाहती हैं.

कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने मां कात्यायनी के स्वरूप और उनकी महिमा के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने से बात करते हुए बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि कत के पोते ऋषि कात्यायन ने देवी आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी. ऋषि कात्यायन ने देवी से अपनी पुत्री के रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा था. उनकी अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उनके घर पुत्री के रूप में अवतार लिया. ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही मां का नाम कात्यायनी पड़ा और वे इसी नाम से संसार में विख्यात हुईं.

मां कात्यायनी के स्वरूप का वर्णन करते हुए महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि मां कात्यायनी शेर पर सवार हैं, उनकी चार भुजाएं हैं और वे अपने एक हाथ में कमल का पुष्प धारण करती हैं. एक हाथ में चमकदार तलवार सुशोभित होती है. एक हाथ अभयमुद्रा और एक हाथ वरद मुद्रा में रहता है.

महंत जी ने कहा कि मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी है. वे हमेशा आसुरी शक्तियों और अधर्म का नाश करने के लिए तत्पर रहती हैं. साथ ही, वे अपने भक्तों, विशेषकर कुंवारी कन्याओं पर विशेष कृपा बरसाती हैं. उन्हें वर प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है.

उन्होंने बताया कि मान्यता है कि द्वापर युग में देवी रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां कात्यायनी का पूजन किया था. कुंवारी कन्याओं के लिए मां कात्यायनी का एक अत्यंत सिद्ध मंत्र है, “ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि . नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥ स्वाहा ॥”

इस मंत्र का श्रद्धा के साथ अनुष्ठान करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है और उनके वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

महंत जी ने कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से “चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना. कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥” मंत्र की स्तुति करता है, उस पर मां प्रसन्न होकर उसे मनोवांछित वरदान देती हैं.

–

पीआईएम/एएस

Share