पंजाब में एक और नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या, नितिन नवीन ने कार्रवाई की उठाई मांग

चंडीगढ़, 16 अक्टूबर . पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्याओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के दो दिन बाद गुरदासपुर में 40 साल के बिक्रमजीत सिंह की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि पंजाब में नशे का संकट खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. परविंदर सिंह झोटा की हत्या के ठीक दो दिन बाद गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह की हत्या ‘आप’ Government के तहत कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने को दिखाती है.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को ही अपनी जान का डर सताने लगे, तो पंजाब किस दिशा में जा रहा है. पंजाब को ड्रग माफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और नागरिकों की सुरक्षा की जरूरत है.
नितिन नवीन की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं. जब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया जा रहा है, तो यह सिर्फ Policeिंग की विफलता नहीं, बल्कि शासन के पूरी तरह फेल होने का संकेत है. दो दिन में मानसा में परविंदर सिंह झोटा और गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह की हत्या ने ‘आप’ Government पर लोगों के भरोसे को तोड़ दिया है. पंजाब को जवाब चाहिए, विज्ञापन नहीं. कार्रवाई चाहिए, घोषणाएं नहीं. ड्रग माफिया और गैंगस्टरों को कुचलना होगा और उनके पीछे के हर Political संरक्षण को उजागर करना होगा. भाजपा पंजाब को नशा मुक्त, गैंगस्टर मुक्त और सुरक्षित बनाएगी.
वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ ने भी राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए. परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर उन्होंने कहा कि पंजाब बहुत खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. लगातार हत्याएं हो रही हैं, थानों पर ग्रेनेड फेंके जा रहे हैं और सच उजागर करने वालों को गोली मारी जा रही है. गुलजार सिंह पर इतना दबाव बनाया गया कि चिट्टा बिकने का मुद्दा उठाने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली. मोहनजीत को Police उठा ले गई और माफिया का नाम न लेने को कहा.
पंजाब की कानून-व्यवस्था पर तरुण चुघ ने से कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि पंजाब के वित्त मंत्री माफिया के वकील की तरह काम कर रहे हैं, उनकी हरकतों को सही ठहरा रहे हैं और नशा बेचने वालों के पक्ष में बोल रहे हैं. क्या चीमा को नहीं पता था कि झोटा ड्रग्स जब्त कराने के लिए मौके पर पहुंचा था? जब उसे गोली मारी गई, क्या उसके पास खरीदा हुआ ड्रग्स का पैकेट नहीं था? चीमा माफियाओं में से किसे बचाना चाहते हैं और क्यों?
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा एक कैडर आधारित संगठन है और हम पंजाब को नशे के जाल से बाहर निकालने और जबरन वसूली, धोखाधड़ी और भ्रामक राजनीति से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं. गैंगस्टर जेलों को अपने दफ्तर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है. शहरों में प्रमुख लोगों को निशाना बनाकर गोली मारी जा रही है, रंगदारी वसूली जा रही है और लोगों को डराने के लिए घरों के बाहर फायरिंग की जा रही है.
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वीकेयू/एबीएम


