नफरत आरएसएस की विचारधारा का हिस्सा, सरकार बताए विदेशी ताकतों के नाम : कांग्रेस नेता राशिद अल्वी

New Delhi, 20 अक्टूबर . कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर तीखी टिप्पणी की है और केंद्र Government पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने के नोटिस के मुद्दे पर अपनी बात रखी.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने से बात करते हुए कहा, “India Government ने कई बार आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन यह संगठन कभी भी अपनी विचारधारा बदलने को तैयार नहीं हुआ. आरएसएस जो नफरत फैलाता है, वही उसकी किताबों में भी दिखता है. नफरत उसकी विचारधारा का एक मुख्य हिस्सा है.”
उन्होंने आगे कहा, “जहां तक विदेशी ताकतों के शामिल होने की बात है, तो India के कई लोगों को यह भी पता चलना चाहिए कि ये लोग कौन हैं. उनके नाम बताइए, उन देशों के नाम बताइए, इन गतिविधियों में शामिल विदेशी ताकतों के नाम बताइए और India में उनके एजेंटों के नाम बताइए. जब आपकी पार्टी सत्ता में है, तो आप उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे हैं? आपको उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए.”
उन्होंने Union Minister किरेन रिजिजू पर भी निशाना साधा. अल्वी ने कहा, “किरेन रिजिजू न चर्चा करने को तैयार हैं, न ही सर्वदलीय बैठक बुलाने को तैयार हैं और तानाशाहों की तरह कह रहे हैं कि हम बिल लाएंगे और विपक्ष उसे समर्थन दे. Government जो बिल लाना चाहती है, विपक्ष उसे कभी भी समर्थन नहीं करेगा. हम जानते हैं कि असम और कश्मीर के अंदर किस तरह का असंवैधानिक डिलिमिटेशन आपने किया है. वे पूरे देश के अंदर महिलाओं का नाम लेकर अपनी मर्जी का डिलिमिटेशन करना चाहते हैं. न कांग्रेस और न ही विपक्ष के दूसरे दल उसे समर्थन देंगे.”
रेस कोर्स मस्जिद को Governmentी जमीन पर अनधिकृत कब्जा बताते हुए छह दिन के अंदर खाली करने के आदेश पर उन्होंने कहा, “वर्तमान Government शायद हिंदुस्तान की हर मस्जिद को Governmentी जमीन पर बनी हुई मस्जिद बता सकती है. मंदिर-मस्जिद के अलावा उनके पास कोई दूसरा मुद्दा नहीं है. Government में कोई मुसलमान मंत्री नहीं है. भाजपा और आरएसएस की मुस्लिम दुश्मनी बार-बार सामने आती है.”
रिजीम चेंज के बयान पर उन्होंने कहा, “रिजीम तो भाजपा ने भी बदली है. Government हमारी थी, लेकिन उन्होंने रिजीम बदली. अब हम रिजीम बदलना चाहते हैं. हम लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए रिजीम बदलना चाहते हैं. जो ईमानदारी के साथ इलेक्शन नहीं करा रहे हैं, उन्हें अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए. हम तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.”
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एससीएच/एबीएम


