दिल्ली में ग्रैप लगाने के बाद भी नहीं सुधरे हालात, स्थानीय बोले- कूड़े के पहाड़ से जीना मुहाल

New Delhi, 23 अक्टूबर . दिल्ली में हवा की बिगड़ती गुणवत्ता और कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के पार पहुंचने के बीच 21 अक्टूबर को पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का पहला चरण लागू कर दिया गया. इस बीच पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके के निवासियों ने प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर जगह-जगह खोदी गई सड़कें, उड़ती धूल, खुला नाला और गाजीपुर डंपिंग यार्ड से निकलने वाली बदबू व धुआं उनकी परेशानी बढ़ा रहे हैं. लोगों ने अधिकारियों और Government से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है.
स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने कहा कि यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाएं तो प्रदूषण के स्तर को काफी कम किया जा सकता है. निर्माण और विकास कार्यों के नाम पर जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, लेकिन उनकी स्थिति सुधारने के लिए अधिकारी उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता. अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत के कारण स्थानीय लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं.
स्थानीय निवासी संतराम प्रधान ने कहा कि गाजीपुर में प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. दिल्ली भर का कूड़ा यहां डाला जाता है और इलाके में बड़ा नाला खुला हुआ है. नाले को ढकने और सड़क बनाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ. कई Governmentें आईं और चली गईं, लेकिन इलाके की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. संतराम प्रधान ने गरीब आबादी की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, फिर भी जरूरी काम नहीं हो रहे हैं.
मोहम्मद बिलाल अंसारी ने कहा कि गाजीपुर में प्रदूषण की समस्या पूरे साल बनी रहती है. ग्रैप का पहला, दूसरा, तीसरा या चौथा चरण लागू होने से भी स्थानीय लोगों की परेशानी खत्म नहीं होती. उन्होंने कूड़े के पहाड़ को इसका प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इलाके में कभी बदबू तो कभी धुएं के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
मुर्तजा ने कहा कि गाजीपुर डंपिंग यार्ड के आसपास की कॉलोनियों और सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से प्रदूषण की समस्या है. उन्होंने कहा कि इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और बच्चे भी प्रभावित होते हैं.
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पीएसके


