भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं और तकनीकी क्षमताएं देश की विशिष्ट शक्ति हैं: उपराष्ट्रपति

New Delhi, 23 अक्टूबर . उपPresident सीपी राधाकृष्णन ने Friday को New Delhi स्थित उपPresident भवन में अनिल के एंटनी द्वारा लिखित पुस्तक एडवांटेज इंडिया: रिशेपिंग द फ्यूचर फॅार एन इक्यूटेबल वर्ल्ड का विमोचन किया.
उपPresident ने पुस्तक के प्रकाशन पर लेखक अनिल के. एंटनी और रूपा पब्लिकेशंस को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक India के उल्लेखनीय बदलाव को दर्शाती है और तेजी से बदलती दुनिया में देश के सामने मौजूद अवसरों का विश्लेषण करती है. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में अपने अनुभवों के आधार पर एंटनी ने India की उभरती शक्तियों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका का विश्लेषण किया है.
उपPresident ने India की विशिष्ट शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं, जनसांख्यिकीय लाभ, बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत संस्थान और विस्तारित तकनीकी क्षमताएं मिलकर India को एक विशिष्ट पहचान और बढ़त प्रदान करती हैं.
उपPresident ने Prime Minister नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में India की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यधिक निर्धनता से बाहर निकाला गया है. उन्होंने कहा कि शिक्षा, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहल ने लाखों लोगों के जीवन में गरिमा और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा दिया है.
सीपी राधाकृष्णन ने समावेशी विकास के महत्व पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं, युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों का सशक्तीकरण India की प्रगति का प्रमुख आधार है. उन्होंने कहा कि तीन करोड़ से अधिक लखपति दीदियों का उभरना महिला-नेतृत्व वाले विकास की सफलता को दर्शाता है. उन्होंने नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का भी उल्लेख किया. साथ ही उन्होंने वंदे India रेलगाडि़यों, हवाई अड्डों, राजमार्गों और रेलवे स्टेशनों द्वारा यात्रा संपर्क सुविधा में हुए महत्वपूर्ण सुधारों को भी रेखांकित किया.
उपPresident ने India में प्रौद्योगिकी के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि कंप्यूटर के आगमन के शुरुआती दौर में लोगों के मन में आशंकाएं थीं, लेकिन बाद में India वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा. उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां India के सामने इसी प्रकार के नए अवसर प्रस्तुत कर रही हैं. उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
उपPresident ने आत्मनिर्भर India के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि India ने विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है. उन्होंने स्वदेश में निर्मित बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक हाल में राष्ट्र को समर्पित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उपलब्धि India की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताओं में हो रही बढोतरी का उदाहरण है.
उपPresident ने India की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय कूटनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और अब India का अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव अधिक व्यापक हुआ है, उसका प्रभाव बढ़ा है और उसका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है. राधाकृष्णन ने India की जी-20 अध्यक्षता के दौरान निभाई गई भूमिका और वसुधैव कुटुंबकम् अर्थात संपूर्ण विश्व एक परिवार है के दर्शन को आगे बढ़ाने में India के योगदान का उल्लेख किया.
उन्होंने जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल कराने में India की भूमिका तथा वैश्विक दक्षिण (विकासशील देशों) की आवाज के रूप में India के उभरने को भी रेखांकित किया.
उपPresident ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम् केवल एक नारा भर नहीं, बल्कि India की मार्गदर्शक विचारधारा है. इसी संदर्भ में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान India की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि India ने न केवल देशव्यापी टीकाकरण अभियान चलाया, बल्कि सौ से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीके उपलब्ध कराकर वैश्विक एकजुटता और मानवता की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की.
उपPresident ने स्पष्ट किया कि India का लाभ मानवता का लाभ है. उन्होंने कहा कि सभी संप्रभु देश समान हैं और उनके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी नए नवाचार या तकनीकी प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए और उसे किसी एक देश की विशिष्ट संपत्ति बनकर नहीं रहना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी के विकास के प्रति अधिक न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, ताकि इसके लाभ साझा किए जा सकें और संपूर्ण मानवता के कल्याण को बढ़ावा मिले.
उपPresident ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित India का लक्ष्य केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि एक दायित्व भी है. इसे प्राप्त करने के लिए राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता आवश्यक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण का कार्य केवल Government के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.
उपPresident ने आशा व्यक्त की कि अनिल के एंटनी द्वारा लिखित पुस्तक युवा भारतीयों को प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक नीति, अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्र निर्माण के विषयों को गहराई से समझने तथा उनमें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी. उन्होंने अनिल के एंटनी को बधाई दीं और लेखक, प्रकाशक तथा पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं.
पुस्तक विमोचन के अवसर पर India Government के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय सूद, Prime Minister की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य एवं अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि, पुस्तक के लेखक अनिल के. एंटनी, रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध संपादक कपिश मेहरा, राजनयिक तथा कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
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