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Sunday, 25 October 2026
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अरुणाचल में झड़पों और बढ़ते व्यापार घाटे पर खड़गे ने केंद्र सरकार को घेरा, बोले- चीन को क्लीन चिट देना बंद करें

अरुणाचल में झड़पों और बढ़ते व्यापार घाटे पर खड़गे ने केंद्र सरकार को घेरा, बोले चीन को क्लीन चिट देना बंद करें

अरुणाचल में झड़पों और बढ़ते व्यापार घाटे पर खड़गे ने केंद्र Government को घेरा, बोले- चीन को क्लीन चिट देना बंद करें

New Delhi, 23 अक्टूबर . कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीन के साथ संबंधों को लेकर केंद्र Government के रवैये पर तीखे सवाल उठाए और मांग की है कि Prime Minister Narendra Modi विपक्ष को निशाना बनाने के बजाय संसद और देश को विश्वास में लें.

कांग्रेस अध्यक्ष ने social media प्‍लेटफॉर्म एक्‍स हैंडल पर कड़े शब्दों वाले पोस्ट में कहा, “चीन को दी गई क्लीन चिटें अब बहुत हो गईं. Prime Minister मोदी को India के सामने सच्चाई बतानी होगी.”

उन्‍होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और कूटनीतिक जवाबदेही से जुड़े तीन तीखे सवाल भी उठाए. राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ जारी झड़पों की पुष्टि भारत-तिब्बत सीमा Police के महानिदेशक द्वारा किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की.

डोकलाम और गलवान में पहले हुए टकरावों को याद करते हुए उन्होंने पूछा कि क्या कोई और गंभीर टकराव पनप रहा है? उन्होंने अगस्त में तकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों का जिक्र किया और कहा कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 47 दिन बाद भी टकराव बंद नहीं हुए हैं, जो मात्र 180 किलोमीटर दूर है.

खड़गे ने सवाल उठाया कि क्या India की गश्ती पहुंच से समझौता किया गया है और इस बात पर जोर दिया कि अरुणाचल प्रदेश India का अभिन्न अंग है. उन्होंने पूछा कि इतने महत्वपूर्ण मामले पर देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने आर्थिक सुरक्षा की ओर मुड़ते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि वित्त वर्ष 2020-21 में गलवान संघर्ष के बाद से India में चीनी आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए थे. उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्वीकार किया है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालना जारी रखे हुए है.

इसके बावजूद खड़गे ने आरोप लगाया कि Government चीनी निवेश पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे रही है और पात्र चीनी-संबंधित उद्यमों को उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) का लाभ देने पर विचार कर रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ‘मेक इन इंडिया’ का नारा असल में “चीन से आयात” में बदल गया है?

राजनयिक जवाबदेही के मुद्दे पर खड़गे ने चीन के साथ हुई व्यापक उच्चस्तरीय बैठकों का जिक्र किया, जिनमें Prime Minister मोदी और President शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी में विशेष प्रतिनिधियों की 25 दौर की वार्ताएं, परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 36 बैठकें और शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स के लगातार शिखर सम्मेलन शामिल हैं.

उन्होंने इन वार्ताओं के ठोस परिणामों के बारे में जानना चाहा और यह भी पूछा कि क्या सीमा पर India के मई 2020 से पहले के गश्ती अधिकार पूरी तरह बहाल कर दिए गए हैं. खड़गे ने सशस्त्र बलों पर पूर्ण विश्वास जताते हुए जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीतिक दिखावे और तथाकथित “हगप्लोमेसी” के बजाय वास्तविक जवाबदेही आवश्यक है.

खड़गे ने Prime Minister से विपक्ष पर हमले बंद करने और इसके बजाय संसद और India की जनता के समक्ष सभी तथ्य रखने का आग्रह किया.

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एएसएच/वीसी

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