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Friday, 16 October 2026
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तेलंगाना: दलित संगठनों ने अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस पर ‘राजनीतिक अवसरवादिता’ का आरोप लगाया

तेलंगाना: दलित संगठनों ने अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस पर ‘Political अवसरवादिता’ का आरोप लगाया

हैदराबाद, 15 अक्टूबर . अंकिता भंडारी मामले में चार अलग-अलग दलित संगठनों ने कांग्रेस पार्टी पर Political अवसरवादिता का आरोप लगाया है.

Thursday को कांग्रेस नेतृत्व को लिखे एक खुले पत्र में इन संगठनों ने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस पार्टी का हस्तक्षेप संवैधानिक नैतिकता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और उसकी राजनीति की निरंतरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

एससी हक्कुला पोराटा संगम (हैदराबाद), डॉ. बीआर अंबेडकर वॉलीबॉल क्लब (हैदराबाद), एनबीसीसी एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ (New Delhi), एसएआईएल एससी और एसटी कर्मचारी संघ (New Delhi) द्वारा अलग-अलग खुले पत्र जारी किए गए हैं.

उन्होंने पूछा कि इंडिया गेट विरोध प्रदर्शन में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की भागीदारी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय Political मंच पर ला दिया है. फिर भी, बड़ा सवाल यह है कि क्या सामाजिक न्याय कांग्रेस के लिए एक निरंतर सिद्धांत है, या एक Political हथियार है, जिसका इस्तेमाल पक्षपातपूर्ण हितों की पूर्ति के लिए किया जाता है?

दलित बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और सामाजिक न्याय संगठनों के प्रतिनिधि मानते हैं कि संवैधानिक मूल्यों को कभी भी Political सुविधा का उपकरण नहीं बनाया जाना चाहिए.

पत्र में लिखा है, “हमारी आपत्ति लोकतांत्रिक विरोध, सार्वजनिक जांच या संस्थागत जवाबदेही पर नहीं है. यह उन सिद्धांतों के चयनात्मक उपयोग पर है जो सार्वभौमिक रूप से लागू होने चाहिए. एक पार्टी जो नियमित रूप से राष्ट्र को संवैधानिक नैतिकता पर उपदेश देती है, उसे अपने Political आचरण में निरंतरता दिखानी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि दलित समुदाय के लिए यह प्रश्न विशेष महत्व रखता है. अंबेडकरवादी आंदोलनों की कई पीढ़ियों ने कानून के समक्ष समानता, संस्थागत जवाबदेही और सामाजिक न्याय की वास्तविक प्राप्ति के लिए संघर्ष किया है. इन आदर्शों को सुविधाजनक Political शब्दावली तक सीमित नहीं किया जा सकता. डॉ. बीआर अंबेडकर की विरासत संविधान के केवल अलंकारिक संदर्भों से कहीं अधिक मांग करती है. यह बौद्धिक ईमानदारी, सैद्धांतिक आचरण और जवाबदेही के समान मानकों की मांग करती है. इसलिए हम कांग्रेस नेतृत्व से इस धारणा पर विचार करने का आह्वान करते हैं कि सामाजिक न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता तब सबसे अधिक दिखाई देती है जब कोई विवाद उसके Political विरोधियों को चुनौती देने का अवसर प्रदान करता है. सामाजिक न्याय चयनात्मक नहीं हो सकता. संवैधानिक नैतिकता सुविधाजनक नहीं हो सकती. और बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत को केवल एक Political शब्दावली तक सीमित नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा कि यह पक्षपातपूर्ण साधन नहीं है. India को ऐसी राजनीति की आवश्यकता है जो सुसंगत सिद्धांतों, संस्थागत उत्तरदायित्व और समानता के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता से निर्देशित हो, न कि Political स्वार्थ से प्रेरित चुनिंदा आक्रोश से.

पत्रों पर एससी हक्कुला पोराटा संगम के संस्थापक अध्यक्ष मारेदु मोहन, डॉ. बीआर अंबेडकर वॉलीबॉल क्लब के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों क्रांति किरण, एनबीसीसी एससी/एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष और महासचिव एसके सोनी और मनोज कुमार, और एसएआईएल एससी और एसटी कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए.

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एमएस/

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