
बीजिंग, 4 अक्टूबर . 4 अक्टूबर को चीन की हिमालयी ‘8.26’ चरम भूवैज्ञानिक आपदा आपातकालीन सीमा पार वैज्ञानिक अभियान टीम क्रायोस्फीयर और लिथोस्फीयर की महाआपदा प्रतिक्रिया पर संयुक्त वैज्ञानिक जांच करने के लिए चीन के छेंगदू से नेपाल के लिए रवाना हुई. इस अभियान में दस से अधिक विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 50 से अधिक शोधकर्ताओं ने भाग लिया.
बता दें कि इस साल 26 अगस्त को नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्र में एक ग्लेशियर अचानक ढह गया, जिससे सीमा पार भूस्खलन हुआ और भारी संख्या में लोग हताहत हुए. इस आपदा की उत्पत्ति नेपाल में हुई और आपदा की प्रक्रिया सीमाओं को पार कर गई, जिसमें चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा.
एकतरफा जांच किसी आपदा की पूरी तस्वीर को पूरी तरह से पुनर्निर्मित करने के लिए अपर्याप्त होती है, इसलिए नेपाल में घटनास्थल पर की गई जांच आपदा की घटनाओं की पूरी श्रृंखला को पुनर्निर्मित करने में एक महत्वपूर्ण कदम बन गई है.
यह वैज्ञानिक अभियान, बर्फ-चट्टान हिमस्खलन के मलबे के प्रवाह, भूस्खलन, मलबे की धाराओं और धाराओं में चरणबद्ध तरीके से परिवर्तित होने की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए, यूएवी हवाई सर्वेक्षण, हेलीकॉप्टर टोही और क्षेत्र भूवैज्ञानिक लॉगिंग और नमूनाकरण जैसी प्रौद्योगिकियों का व्यापक रूप से उपयोग करेगा.
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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