
हैदराबाद, 17 सितंबर . बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने Thursday को कहा कि उनकी पार्टी बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और Chief Minister ए रेवंत रेड्डी के परिवारों की संपत्तियों की उनके जन्म से लेकर अब तक की जांच के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि यह जांच किसी मौजूदा हाई कोर्ट या Supreme Court के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए.
केटीआर ने कहा कि Chief Minister रेवंत रेड्डी को इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए और तुरंत किसी मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने पर सहमत होना चाहिए.
उन्होंने यह प्रतिक्रिया Chief Minister रेवंत रेड्डी द्वारा विधानसभा में दिए गए उस बयान पर दी, जिसमें उन्होंने केसीआर और उनके परिवार की जमीनों की जांच कराने की घोषणा की थी.
राष्ट्रीय एकीकरण दिवस के अवसर पर तेलंगाना भवन में तिरंगा फहराने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केटीआर ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. उन्होंने मांग की कि जांच किसी एसआईटी या विशेष टीम के बजाय मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में हो.
उन्होंने कहा कि यदि उनके परिवार की ओर से जरा सी भी गलती साबित होती है तो वे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
केटीआर ने दावा किया कि उनके पिता केसीआर के पास राजनीति में आने से बहुत पहले से पर्याप्त पैतृक संपत्ति थी. उन्होंने कहा कि केसीआर का जीवन एक ‘खुली किताब’ की तरह है.
उन्होंने बताया कि केसीआर का जन्म 1954 में एक जमींदार परिवार में हुआ था. उनके अनुसार, चिंतमडाका में उनके परिवार का घर लगभग दो एकड़ में फैला हुआ था और उनके पूर्वजों के पास सैकड़ों एकड़ जमीन थी.
केटीआर ने कहा कि परिवार की संपत्ति पहले कोनापुर क्षेत्र में थी. 1930 के दशक में सिंचाई परियोजना के लिए कुछ जमीन अधिग्रहित की गई थी और मुआवजे में मिली राशि से केसीआर के पिता ने चिंतमडाका में जमीन खरीदी, जहां बाद में परिवार बस गया.
उन्होंने सवाल उठाया कि वर्तमान में परिवार के पास मौजूद जमीन को संपत्ति में वृद्धि माना जाए या कमी. उन्होंने कहा, “72 साल बाद अब उनके पास केवल 67 एकड़ जमीन है. क्या यह संपत्ति बढ़ने का संकेत है या घटने का?”
केटीआर ने कहा कि रेवंत रेड्डी पहले बार-बार “1,000 एकड़ के फार्महाउस” की बात करते थे, लेकिन कल विधानसभा में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि जमीन का क्षेत्रफल 67 एकड़ है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि बाकी 933 एकड़ जमीन मिल जाए तो वे उसे Government को सौंपने के लिए तैयार हैं.
केटीआर ने Chief Minister से केसीआर के खिलाफ कथित झूठे प्रचार और आरोपों के लिए माफी मांगने की मांग भी की.
उन्होंने कहा कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को गरिमा के साथ व्यवहार करना चाहिए और विधानसभा को झूठे आरोपों तथा भ्रामक बातों का मंच नहीं बनाना चाहिए.
केटीआर ने आरोप लगाया कि राज्य Government द्वारा किए गए चुनावी वादे 1,000 दिनों के शासन के बाद पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक विफलता और कामकाज में ठहराव साफ दिखाई दे रहा है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचने के लिए बीआरएस विधायक दल को अलोकतांत्रिक तरीके से विधानसभा से निलंबित किया गया.
Chief Minister पर भाजपा के साथ मिलकर विपक्ष की अनुपस्थिति में विधानसभा की कार्यवाही चलाने का आरोप लगाते हुए केटीआर ने Government को मानसून सत्र एक महीने बढ़ाने और निलंबन वापस लेने की चुनौती दी.
उन्होंने कहा, “Chief Minister यह कहने के बजाय कि विपक्ष में उन्हें आंखों में आंखें डालकर बात करने का साहस नहीं है, सत्र बढ़ाएं. हम केवल आंखों में आंखें डालकर बात ही नहीं करेंगे, बल्कि तेलंगाना की जनता की ओर से महालक्ष्मी योजना के तहत 2,500 रुपए, 4,000 रुपए पेंशन, निर्बाध बिजली, सिंचाई, रायतु बंधु और रायतु बीमा बंद किए जाने जैसे मुद्दों पर जवाब भी मांगेंगे.”
केटीआर ने Chief Minister के ढाई घंटे लंबे विधानसभा भाषण को अज्ञानता का बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि उसमें न कोई सिर था और न कोई पैर.
उन्होंने दावा किया कि Chief Minister द्वारा पहले किए गए कई आरोप अब पूरी तरह गलत साबित हो चुके हैं, जिनमें प्रगति भवन में 150 बेडरूम और सोने के बाथरूम बनाए जाने या एकीकृत सचिवालय के नीचे खजाना खोजने के लिए गुप्त सुरंगें खोदने जैसे दावे शामिल हैं.
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एएमटी/डीकेपी